सत्या राजपूत, रायपुर। लल्लूराम डॉट कॉम की खबर का बड़ा असर हुआ है। निसदा में संचालित 7 अलग-अलग खदानों पर निर्धारित क्षेत्र से अधिक भूमि में अवैध उत्खनन पाए जाने के बाद खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सातों खदानों पर कुल 30 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। पेनल्टी के बाद सभी खदानों के लाइसेंस रद्द कर उन्हें सील कर दिया गया है।

उप खनिज अधिकारी उमेश भार्गव ने बताया कि अवैध उत्खनन की जानकारी मिलने के बाद जांच कमेटी गठित की गई थी। जांच कमेटी की रिपोर्ट में निर्धारित जमीन से अधिक क्षेत्र में अवैध उत्खनन पाया गया। जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है।

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इन खदानों के लाइसेंस किये गए रद्द

जिन खदानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें देवानंद साहू खदान, संतोष यादव खदान, लालचंद अग्रवाल खदान, श्याम सुंदर यादव खदान, जय बजरंग औद्योगिक खदान, धनेश साहू खदान और दुष्यंत साहू खदान शामिल हैं।

विभाग की ओर से सातों खदानों पर कुल 30 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की पेनल्टी भी लगाई गई है। पेनल्टी की राशि जमा नहीं होने की स्थिति में मामला जिला न्यायालय में विचाराधीन है।

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जनवरी 2025 में भी की गई थी कार्रवाई

लल्लूराम डॉट कॉम ने इस मामले को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थी। 19 जनवरी 2025 को प्रकाशित खबर में महानदी किनारे अवैध मलबा भंडारण के मामले में खनिज विभाग ने निसदा में संचालित पत्थर खदानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें अस्थायी रूप से बंद कराया था। सभी खदान संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे और एक अवैध रूप से संचालित खदान को सील भी किया गया था। साथ ही पर्यावरण संरक्षण विभाग को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी गई थी।

चूना पत्थर खदान के मलबे से पटा महानदी का किनारा

बता दें कि निसदा में महानदी पर बैराज बना हुआ है, जिससे महासमुंद जिले और आरंग-रायपुर क्षेत्र में जल आपूर्ति होती है। आरोप था कि निसदा में संचालित करीब 15 पत्थर खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट और मलबे को बिना पर्यावरण स्वीकृति के महानदी के किनारे डंप किया जा रहा था। रोजाना सैकड़ों वाहनों से यहां मलबा डंप किए जाने की बात सामने आई थी।

इससे महानदी की चौड़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। मामले को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्राथमिकता से उठाया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और खदानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और आज जाकर जुर्माना के साथ-साथ लाइसेंस रद्द कर खदानें सील की कार्रवाई की गई।

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