हेमंत शर्मा, इंदौर। कनाड़िया थाना क्षेत्र में करीब 500 करोड़ रुपये कीमत की बताई जा रही जमीन को लेकर हुए विवाद के मामले में नया मोड़ आ गया है। सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस कमिश्नर ने कनाड़िया थाना प्रभारी को तलब कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि भूरी टेकरी स्थित डायमंड कॉलोनी में जमीन विवाद की सूचना पर टीम मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस जवानों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति निर्मित हो गई। घटना में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। हालांकि इसके बावजूद दर्ज की गई एफआईआर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा का प्रकरण तो दर्ज किया, लेकिन आरोपियों को नामजद करने के बजाय मामला अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया।

सवालों के घेरे में कार्रवाई

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट हुई थी उन्हें सर में गंभीर चोट आई है लेकिन आरोपियों के नाम एफआईआर में शामिल क्यों नहीं किए गए? आखिर ऐसी कौन सी वजह रही कि पुलिस को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ा? यदि इसी प्रकार की घटना में कोई सामान्य नागरिक पुलिस से हाथापाई करता तो उसके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होती। ऐसे मामलों में अक्सर पुलिस की त्वरित कार्रवाई देखने को मिलती है, लेकिन इस मामले में कार्रवाई की गति और स्वरूप दोनों सवालों के घेरे में हैं।

घायल जवानों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

जानकारी के मुताबिक विवाद शांत कराने पहुंचे पुलिस जवानों आशीष शर्मा और विजय सिकरवार को सर में गंभीर चोटें आईं। सूत्रों के अनुसार एक जवान के सिर में चोट लगी, जबकि दूसरे जवान के भी घायल होने की बात सामने आई है। यदि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान घायल हुए हैं तो उनकी सुरक्षा और उनके साथ हुई घटना के लिए जिम्मेदार कौन है, यह सवाल भी उठ रहा है।

अगर इस तरह की घटना कोई आम आदमी करता तो उसका क्या हश्र करती पुलिस

अगर कोई आम आदमी पुलिस के ऊपर इस तरीके का हमला करता तो शायद वह पुलिस अभी रक्षा से भाग चुका होता उसके हाथ पैर टूटे हुए नजर आते हैं और कमरे पर यह कहता हुआ नजर आता अपराध करना पाप है पुलिस हमारे बाप है लेकिन किसी राजनीतिक दबाव में यह पूरा घटनाक्रम हुआ इस पर सवाल खड़े होते हैं यहां तक बताया जा रहा है कि एक क्षेत्र में स्थित दुकान से पुलिस DVR तक उठा के ले गई जिसके अंदर मौके के सारे वीडियो कैद हो गए थे

500 करोड़ की जमीन और बढ़ते सवाल

करीब 17 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे इस विवाद की कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। क्षेत्र में लंबे समय से जमीन कब्जाने को लेकर विभिन्न चर्चाएं होती रही हैं। अब पुलिस टीम के साथ हुई कथित मारपीट और उसके बाद हुई कार्रवाई ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान पुलिस नामजद आरोपियों को शामिल करती है या नहीं और पुलिस जवानों पर हुए कथित हमले के मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m