देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हरियाणा के सोनीपत से दिल्ली के बीच दूसरे दिन भी हाई स्पीड ट्रायल जारी रहा।
जींद। भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ाया है। हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली इको-फ्रेंडली ट्रेन का परीक्षण लगातार दूसरे दिन भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस विशेष Hydrogen Train India Speed Trial के तहत रेलगाड़ी को सोनीपत से दिल्ली के रेल मार्ग पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की जबरदस्त रफ्तार से दौड़ाया गया। परीक्षण की शुरुआत में एक पारंपरिक डीजल इंजन इस ट्रेन को जींद जंक्शन से सोनीपत स्टेशन तक लेकर आया, जिसके बाद हाइड्रोजन ईंधन की शक्ति से इसका स्पीड रन शुरू हुआ। शनिवार को इस अत्याधुनिक ट्रेन ने दिल्ली और सोनीपत के बीच कुल चार फेरे लगाकर अपनी तकनीकी क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
विभिन्न स्पीड मानकों पर शानदार प्रदर्शन
सोनीपत से दिल्ली के सब्जी मंडी रेलवे स्टेशन के बीच आयोजित इस गति परीक्षण के दौरान ट्रेन की कार्यक्षमता को अलग-अलग गति स्तरों पर परखा गया। जींद से रवाना होते समय इसकी प्रारंभिक गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई थी, लेकिन मुख्य रूट पर आते ही इसे क्रमश: 80, 100 और अंत में 120 किलोमीटर प्रति घंटे के उच्चतम मानकों पर चलाकर देखा गया। इससे पहले शुक्रवार को हुए प्रथम चरण के परीक्षण में इस ट्रेन को दिल्ली से सोनीपत के बीच अधिकतम 85 और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौड़ाया गया था। शुक्रवार के सफल परीक्षणों के बाद यह ट्रेन देर रात सुरक्षित रूप से जींद वापस लौट आई थी।
सुरक्षा और तकनीकी प्रणालियों की जांच
इस महत्वपूर्ण उच्च-गति परीक्षण के दौरान रेलवे के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ट्रेन के हर एक बारीक पहलू और सुरक्षा मानकों पर पैनी नजर रख रही है। इस सघन जांच प्रक्रिया में विशेष रूप से ट्रेन की आपातकालीन ब्रेकिंग प्रणाली, इंजन की वास्तविक ऊर्जा क्षमता, सफर के दौरान होने वाले कंपन और तेज गति में ट्रैक पर ट्रेन की स्थिरता का गहन आंकलन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में जब यह ट्रेन यात्रियों के लिए नियमित रूप से पटरी पर उतरे, तब सुरक्षा या संचालन में कोई बाधा न आए। ईंधन की निरंतर आपूर्ति के लिए बाहर से विशेष गैस मंगवाई गई है।
हरित और आधुनिक परिवहन का भविष्य
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह ईंधन परीक्षण देश के संपूर्ण हाइड्रोजन रेल प्रोजेक्ट का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इसमें मिलने वाली सफलता भारत में पूरी तरह से स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रेल यातायात व्यवस्था की नींव रखेगी। डीजल इंजनों पर निर्भरता खत्म होने से न केवल जहरीले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, बल्कि यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल साबित होगी। भारतीय रेल इस सफल कदम के जरिए वैश्विक स्तर पर हरित और आधुनिक परिवहन के क्षेत्र में अपनी एक नई और बेहद मजबूत पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

