भारत ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जिनेवा (UN Geneva) को पांच युवा मोर उपहार में दिए हैं। इनमें चार नीले मोर और एक दुर्लभ सफेद नर मोर शामिल है। इन्हें स्विट्जरलैंड स्थित पैलेस ऑफ नेशंस परिसर में रखा गया है। भारत के इस उपहार को भारत-UN के लंबे और मैत्रीपूर्ण संबंधों के साथ-साथ एक पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों गिफ्ट किए गए 5 मोर?

UN Geneva परिसर में मोरों की संख्या लगातार घट रही थी और हाल ही में यहां केवल एक मोर बचा था। ऐसे में भारत की ओर से दिए गए पांचों मोरों का मुख्य उद्देश्य परिसर में मोरों की आबादी को फिर से बढ़ाना है।

भारत के UN मिशन ने इसे भारत और संयुक्त राष्ट्र की साझेदारी का नया आयाम बताया। वहीं, UN Geneva ने सोशल मीडिया पर इन मोरों का स्वागत करते हुए इसे मजाकिया अंदाज में ‘Peacock Diplomacy’ से जोड़ा और चीन की चर्चित ‘Panda Diplomacy’ का जिक्र किया।

3 महीने तक अस्थायी पक्षीघर में रहेंगे

जिनेवा पहुंचने के बाद पांचों मोरों को फिलहाल एरियाना पार्क में बने एक बड़े अस्थायी पक्षीघर में रखा गया है। यहां वे नए वातावरण के अनुकूल होंगे। करीब तीन महीने बाद उन्हें UN परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति दी जाएगी।

UN Geneva की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने बताया कि चार नीले और एक सफेद मोर संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों से भी मेल खाते हैं।

1981 में भी भारत ने दिए थे मोर

भारत और UN Geneva के बीच मोरों का संबंध नया नहीं है। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जिनेवा को मोरों की एक जोड़ी भेजी थी। भारतीय मिशन के राजदूत अरिंदम बागची ने इस पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने पर खुशी जताई।

मोरों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम

मोरों को विशेष एंबुलेंस के जरिए जिनेवा पहुंचाया गया। हालांकि, शुरुआती दिनों में लोमड़ियों से उनकी सुरक्षा बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक युवा मोर अभी ऊंची डालियों पर सोने के अभ्यस्त नहीं हैं, जिससे वे शिकारियों के निशाने पर आ सकते हैं।

UN परिसर में मोरों की पुरानी परंपरा

UN Geneva में मोर रखने की परंपरा संयुक्त राष्ट्र से भी पुरानी है। संपत्ति के पूर्व मालिक गुस्ताव रेविलियोड ने 1890 में इसे जिनेवा शहर को सौंपते समय शर्त रखी थी कि परिसर में मोरों को स्वतंत्र रूप से घूमने दिया जाए। तभी से मोर इस परिसर की पहचान बन गए हैं। अब इन पांचों नए ‘राजनयिकों’ के लिए जल्द ही नामकरण प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।

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