एक ही कंपनी, एक ही ब्रांड और लगभग एक जैसी पैकेजिंग—फिर भी भारत और विदेशों में बिकने वाले प्रोडक्ट की रेसिपी, चीनी, तेल और लेबलिंग में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। यही वजह है कि पैकेज्ड फूड को लेकर भारत में फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल की मांग लगातार तेज हो रही है।
फैंटा से समझिए फर्क
ब्रिटेन में बिकने वाली फैंटा और भारत में मिलने वाली फैंटा के पोषण प्रोफाइल में अंतर बताया जाता है। भारत वाले वर्जन में चीनी की मात्रा अधिक होने के साथ आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल भी चर्चा में रहा है। यूरोप में ऐसे कुछ रंगों पर पैकेट के सामने चेतावनी देना जरूरी है, जबकि भारत में जानकारी मुख्यतः पीछे दी जाती है।
किटकैट और मैगी की रेसिपी भी अलग
किटकैट के भारतीय वर्जन में कोको सॉलिड की मात्रा ऑस्ट्रेलियाई वर्जन की तुलना में काफी कम बताई जाती है। वहीं, मैगी के कई भारतीय वर्जन में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है, जबकि ब्रिटेन के कुछ वर्जन में सनफ्लावर ऑयल मिलता है।
दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन में बिकने वाले कुछ मैगी पैकेट भारत में ही तैयार होते हैं, लेकिन वहां पैकेट के सामने हाई सॉल्ट की चेतावनी दिखाई देती है। भारत में वही जानकारी इस तरह प्रमुखता से सामने नहीं आती. नेस्ले ने 2024 में भारत में बिना अतिरिक्त चीनी वाला सेरेलैक पेश करने की घोषणा की। इससे पहले भारत में लंबे समय तक चीनी वाले वर्जन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे।
असली विवाद लेबलिंग का
भारत में फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग पर वर्षों से बहस चल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ चेतावनी वाले लेबल की मांग करते हैं, जबकि खाद्य उद्योग का तर्क है कि अलग-अलग देशों में स्वाद, कीमत और उपभोक्ता पसंद के अनुसार उत्पाद बदलना स्वाभाविक है।
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी है कि पैकेट के पीछे प्रति 100 ग्राम चीनी, नमक, फैट और इस्तेमाल किए गए तेल की जानकारी जरूर पढ़ें। सामग्री सूची में सबसे ऊपर लिखी चीज आमतौर पर सबसे ज्यादा मात्रा में मौजूद होती है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


