हेमंत शर्मा, इंदौर। करीब नौ साल पुराने सड़क हादसे के मामले में इंदौर की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। लापरवाही से वाहन चलाकर एक बुजुर्ग की मौत का कारण बने आरोपी को दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रिन्सी अग्रवाल की अदालत ने आरोपी हरीश मौरे को भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के तहत दोषी मानते हुए दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

जिला अभियोजन कार्यालय के अनुसार, इस मामले में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी वर्षा पाठक ने प्रभावी पैरवी की, जिसके बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।

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क्लीनिक जाते समय हुआ था दर्दनाक हादसा

अभियोजन के अनुसार, घटना 14 जनवरी 2017 की शाम करीब 7:35 बजे की है। रामकिशन चौहान अपनी बहू के साथ अन्नपूर्णा रोड स्थित एक क्लीनिक में इलाज कराने पैदल जा रहे थे। जैसे ही दोनों चौधरी साइकिल के सामने सड़क पर पहुंचे, तभी महू नाका की ओर से तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रहे एक्टिवा चालक ने रामकिशन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रामकिशन चौहान सड़क पर गिर पड़े और उनके सिर, आंख, चेहरे तथा शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने भी हादसे की पुष्टि की।

इलाज के बाद घर लौटे, लेकिन नहीं बच सकी जान

हादसे के बाद घायल रामकिशन चौहान को तत्काल यूनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चला। इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद दुर्घटना में लगी गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में धारा 304ए जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।

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जांच में बढ़ती गईं धाराएं

पुलिस ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ धारा 279 और 337 के तहत मामला दर्ज किया था। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोट और अस्थिभंग की पुष्टि होने पर धारा 338 भी जोड़ी गई। बाद में घायल की मौत होने पर प्रकरण में धारा 304ए भारतीय दंड संहिता शामिल की गई। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का एक्टिवा वाहन और उससे जुड़े दस्तावेज जब्त किए। घटनास्थल का निरीक्षण, गवाहों के बयान और मेडिकल दस्तावेजों सहित सभी साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।

साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए। सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी हरीश मौरे को लापरवाही से वाहन चलाकर मृत्यु कारित करने का दोषी पाया और उसे दो वर्ष के कारावास तथा 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

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