हेमंत शर्मा, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के लिए केंद्र सरकार ने बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। भारत सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के तहत इंदौर नगर निगम की 1,214.54 करोड़ रुपये की जल प्रदाय और सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। नई दिल्ली में आयोजित आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एपेक्स कमेटी की बैठक में नगर निगम द्वारा प्रस्तुत परियोजनाओं को तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद अब इनके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना, सीवरेज नेटवर्क का विस्तार करना और आधुनिक तकनीक के जरिए जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।

जल प्रदाय और सीवरेज परियोजनाओं पर होगा बड़ा निवेश

स्वीकृत परियोजनाओं में 907.74 करोड़ रुपये की लागत से जल प्रदाय से जुड़ी योजनाएं और 306.80 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नई जल वितरण लाइनें बिछाई जाएंगी, पुराने नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा और जहां आवश्यकता है वहां सीवरेज व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।नगर निगम का मानना है कि इससे भविष्य में बढ़ती आबादी के बावजूद शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था अधिक सक्षम और व्यवस्थित हो सकेगी।

302 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता, निगम पर घटेगा वित्तीय बोझ

इस पूरी परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अर्बन चैलेंज फंड के तहत कुल लागत का लगभग 25 प्रतिशत, यानी 302.70 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार सहायता के रूप में उपलब्ध कराएगी। इससे नगर निगम पर वित्तीय दबाव कम होगा और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।अधिकारियों के अनुसार यह राशि मुख्य रूप से नर्मदा परियोजना फेज-4 के तहत नई जल वितरण लाइनों के निर्माण और सीवरेज लाइन बिछाने में खर्च की जाएगी।

आधुनिक तकनीक से होगा जल प्रबंधन

बैठक में नगर निगम ने जल वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने, सीवरेज नेटवर्क के विस्तार और आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) विकसित करने का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इन परियोजनाओं में वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा गया है।आधुनिक तकनीक के उपयोग से उपचारित पानी का दोबारा उपयोग बढ़ाया जाएगा, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी और भूजल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ सीवरेज प्रबंधन भी बेहतर होगा। उपचारित पानी का पुन: उपयोग उद्योगों, उद्यानों और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में किया जा सकेगा। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।नगर निगम का मानना है कि यह पहल इंदौर को सतत और आधुनिक शहरी विकास की दिशा में आगे ले जाएगी।

बैठक में शामिल रहे वरिष्ठ अधिकारी

नई दिल्ली में आयोजित एपेक्स कमेटी की बैठक में मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल तथा यूडीडी के दिव्यांक सिंह वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। अधिकारियों ने परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इन्हें मंजूरी प्रदान की।

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