हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में चोरी की बाइक से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित राजनीतिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस महिला की बाइक चोरी हुई थी, उसी महिला ने पुलिस को थाने पहुंचकर सूचना दी कि उसकी बाइक आलेख द्विवेदी नाम का युवक चला रहा है। महिला की शिकायत के बाद भी पुलिस ने पहले कथित तौर पर यह कहते हुए कार्रवाई से इनकार कर दिया कि मामला खत्म हो चुका है और अब कार्रवाई करने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन जब महिला ने पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाया तो पुलिस ने आलेख द्विवेदी को पकड़ लिया और थाने ले गई। इसके बाद कहानी में अचानक ऐसा मोड़ आया कि पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े होने लगे। आरोप है कि एक विधायक के फोन के बाद पूरा मामला पलट गया और कुछ ही देर में पकड़े गए युवक को थाने से छोड़ दिया गया।

महिला ने खुद पुलिस को बताया- मेरी चोरी की बाइक आलेख चला रहा है

मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब बाइक की मालिक महिला को जानकारी मिली कि उसकी चोरी हुई बाइक आलेख द्विवेदी नाम का युवक चला रहा है। महिला सीधे बाणगंगा थाने पहुंची और पुलिस को इसकी जानकारी दी। महिला का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय कथित तौर पर यह कह दिया कि मामला खत्म हो चुका है, अब कार्रवाई करने का कोई मतलब नहीं है। यही से सवाल खड़ा होता है कि अगर चोरी हुई बाइक का पता चल गया था और बाइक किसके कब्जे में है, इसकी जानकारी पुलिस तक पहुंच चुकी थी, तो फिर कार्रवाई से इनकार क्यों किया गया?

महिला के दबाव के बाद पुलिस ने पकड़ा

महिला ने पुलिस से कार्रवाई की मांग जारी रखी। लगातार दबाव बनने के बाद पुलिस ने आखिरकार आलेख द्विवेदी को पकड़ा और थाने लेकर आई। यानी जिस कार्रवाई को पुलिस पहले जरूरी नहीं मान रही थी, वही कार्रवाई महिला के दबाव के बाद अचानक शुरू हो गई। पुलिस ने युवक को पकड़कर थाने तक पहुंचाया, लेकिन इसके बाद आरोप है कि राजनीतिक हस्तक्षेप ने पूरे घटनाक्रम की दिशा ही बदल दी।

विधायक का फोन आया और पलट गया पूरा मामला!

सूत्रों के मुताबिक, आलेख को थाने ले जाने के बाद एक विधायक की ओर से थाना प्रभारी को फोन किया गया। इसके बाद पुलिस का रुख बदलने का आरोप है। बताया जा रहा है कि पकड़े गए युवक को थाने ले जाने के करीब एक घंटे के भीतर ही छोड़ दिया गया। अब सवाल यह है कि जिस युवक को महिला की सूचना और कथित रूप से चोरी की बाइक के मामले में पुलिस ने पकड़ा था, उसे इतनी जल्दी क्यों छोड़ दिया गया? क्या विधायक के फोन के बाद पुलिस पर दबाव आया? क्या इसी दबाव में मामला शांत कर दिया गया?

अब पुलिस की कहानी भी बदली

मामला सामने आने के बाद पुलिस की ओर से अब एक अलग कहानी बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि आलेख द्विवेदी ने यह गाड़ी विनायक यादव से खरीदी थी और पुलिस को इस बारे में आलेख ने कोई सूचना नहीं दी थी। पुलिस के इस बयान के बाद सवाल और भी गंभीर हो गया है। अगर आलेख ने किसी व्यक्ति से गाड़ी खरीदी थी, तो फिर वाहन के दस्तावेज, मालिकाना हक और वाहन की चोरी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की गई? और अगर जांच जरूरी थी तो उसे थाने से छोड़े जाने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? पुलिस के बयान में आया यह नया पक्ष अब सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन रहा है।

करणी सेना ने कैसे निकाला चोरी की बाइक का सुराग?

करणी सेना के नगर अध्यक्ष नितिन ठाकुर के मुताबिक, उन्हें कई दिनों से शक था कि चोरी की गाड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी शक के आधार पर वाहन का चेसिस नंबर निकाला गया और उसके जरिए बाइक की वास्तविक मालिक महिला से संपर्क किया गया। महिला को जब उसकी बाइक की जानकारी दी गई तो उसने पुलिस को बताया कि उसकी चोरी हुई गाड़ी आलेख द्विवेदी नाम का युवक चला रहा है। यानी जिस मामले में पुलिस पहले कथित तौर पर कार्रवाई की जरूरत नहीं बता रही थी, उसमें एक संगठन के पदाधिकारी की पहल के बाद बाइक की मालिक तक पहुंच बनाई गई और फिर पुलिस को जानकारी दी गई।

पुलिस ने पकड़ा, फिर छोड़ दिया- सवालों के घेरे में कार्रवाई

अब पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर बाइक चोरी की थी तो कार्रवाई क्यों नहीं? अगर बाइक चोरी की नहीं थी तो महिला की शिकायत पर आलेख को पकड़ा क्यों गया? अगर आलेख ने विनायक यादव से बाइक खरीदी थी तो खरीद के दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं हुई? अगर मामला गंभीर नहीं था तो महिला को पुलिस पर दबाव बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

सबसे बड़ा सवाल

आखिर विधायक का फोन आने के बाद थाने में ऐसा क्या हुआ कि पकड़ा गया युवक कुछ ही देर में बाहर आ गया? चोरी की बाइक का मामला या राजनीतिक दबाव का खेल? पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ बाइक की मालिक महिला पुलिस के पास पहुंचकर अपनी चोरी हुई गाड़ी के इस्तेमाल की जानकारी देती है। दूसरी तरफ पुलिस पहले कार्रवाई से इनकार करती है, फिर दबाव बनने पर आरोपी बताए जा रहे युवक को पकड़कर थाने लाती है और उसके बाद कथित तौर पर विधायक का फोन आने पर उसे छोड़ देती है।

अब पुलिस का बदला हुआ पक्ष सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं करणी सेना के नितिन ठाकुर का कहना है कि कई दिनों की जानकारी जुटाने और चेसिस नंबर के जरिए बाइक की मालिक तक पहुंचने के बाद पूरा मामला सामने आया। अब असली सवाल सिर्फ बाइक चोरी का नहीं है। सवाल यह है कि पुलिस जिसे पकड़कर थाने ले गई, उसे इतनी जल्दी किसके दबाव में छोड़ा?

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