कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में जनसभा, धरना-प्रदर्शन और रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर राजनीति गरमा गई है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Abhay Singh Chautala ने मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini को पत्र लिखकर सरकार के उस आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है, जिसमें सितंबर माह तक जनसभा, धरना, प्रदर्शन और रैली पर रोक लगाए जाने की बात कही गई है। इनेलो ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया है।
चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में अभय चौटाला ने कहा कि इनेलो ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों की बचत की पक्षधर है, लेकिन किसी भी नीति को संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है, ऐसे में धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।
अभय चौटाला ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय जनता की आवाज उठाने वालों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताना और सरकार से जवाब मांगना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
पत्र में सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभय चौटाला ने कहा कि यदि प्रदेश की वित्तीय स्थिति खराब है तो सरकार को पहले अपने अनावश्यक खर्चों पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि भाजपा सरकार बनने के बाद कितना कर्ज लिया गया और किस प्रकार विज्ञापनों पर खर्च किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से संवाद किए बिना इस प्रकार के निर्देश जारी करना उचित नहीं है।
इनेलो प्रमुख ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और उसकी आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास जनभावनाओं के खिलाफ माना जाएगा। पार्टी ने इस आदेश का पुरजोर विरोध करते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

