NEET पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में इनेलो ने हरियाणा के सभी जिलों में प्रदर्शन कर उपायुक्तों को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. सम्पत सिंह ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
चंडीगढ़। NEET परीक्षा पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) की युवा विंग, छात्र विंग ISO और कानून प्रकोष्ठ ने शुक्रवार को हरियाणा के सभी जिलों में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर NEET पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक और हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री प्रो. सम्पत सिंह ने चंडीगढ़ स्थित इनेलो मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर नुकीली कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया है तो यह बेहद गंभीर और बर्बरतापूर्ण कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि यह केवल छात्रों पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और देश के भविष्य पर हमला है।
‘जो सरकार युवाओं से डरती है, वह देश का भविष्य नहीं बना सकती’
इनेलो नेता ने कहा, “जो सरकार अपने ही युवाओं से डरती है, वह देश का भविष्य नहीं बना सकती। छात्रों पर लाठीचार्ज करवाने के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को देश के छात्रों और उनके अभिभावकों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें डराने और बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है। प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि देश धीरे-धीरे अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रहा है। लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनी जाती है, उसे लाठियों के बल पर दबाया नहीं जाता।
‘छात्र देश की सबसे बड़ी ताकत’
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि आज के युवा और छात्र देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि सरकार उनकी आवाज को कुचलने का प्रयास करेगी तो इसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने वाली सरकारें कभी सफल नहीं होतीं।
एक शिक्षक के तौर पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि किताबें लेकर चलने वाले छात्रों का स्वागत न्याय और संवाद से होना चाहिए, न कि बैरिकेड और लाठियों से। उन्होंने कहा कि कोई भी छात्र अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़क पर बैठने के लिए मजबूर नहीं होता, जब तक कि व्यवस्था उसे निराश न कर दे।
‘पेपर लीक से टूटते हैं माता-पिता के सपने’
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि हर पेपर लीक केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करता, बल्कि माता-पिता के वर्षों के त्याग और उनके बच्चों के भविष्य के सपनों को भी तोड़ देता है। छात्र किसी प्रकार की राहत या दान नहीं मांग रहे हैं, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और पेपर लीक मुक्त परीक्षा व्यवस्था तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अपना संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं।
उन्होंने NEET पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
फास्ट ट्रैक अदालतों पर भी उठाए सवाल
प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक अदालतों की बात किए जाने पर प्रो. सम्पत सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले भी कई बार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गईं, लेकिन उनका केस निपटाने की दर मात्र 9 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि छात्रों और अभिभावकों को समयबद्ध और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करना होगा।
इनेलो ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापनों के माध्यम से NEET पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


