पटना: राजधानी के गांधी मैदान और कोतवाली थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मधुबनी से अधिवक्ता आशुतोष कुमार को गिरफ्तार किया है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये गबन करने का संगीन आरोप है।
10 लाख के गबन में गिरफ्तारी
आशुतोष कुमार श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पैनल अधिवक्ता थे। वर्ष 2024 में कंपनी ने उनके खिलाफ 10 लाख रुपये के गबन का मामला दर्ज कराया था। जांच में पाया गया कि आशुतोष ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सुलह का नाटक रचा और कंपनी को चूना लगाया। गांधी मैदान थाने की एसआई तृष्णा कुमारी के नेतृत्व में टीम ने मधुबनी जाकर उन्हें गिरफ्तार किया। पटना सिविल कोर्ट की न्यायिक दंडाधिकारी आरती उपाध्याय ने आरोपी को 20 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
जिंदा व्यक्ति को बताया मृत
धोखाधड़ी का तरीका बेहद शातिर था। अधिवक्ता ने कंपनी को सूचना दी कि अगस्त 2023 में ‘संजय साफी’ नामक व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हो गई है। इसके प्रमाण के रूप में फर्जी एफआईआर, चार्जशीट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और यहां तक कि लोक अदालत (पीएलए) के फर्जी आदेश तक सौंप दिए गए। इसके आधार पर कंपनी ने मृतक की पत्नी को 10 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। बाद में खुलासे में पता चला कि संजय साफी जीवित है और मधुबनी में पीएलए कोर्ट 2012 से सक्रिय ही नहीं है।
मैग्मा इंश्योरेंस से 50 लाख की ठगी
आरोपी अधिवक्ता का जाल यहीं खत्म नहीं हुआ। कोतवाली थाने में मैग्मा इंश्योरेंस कंपनी ने भी उन पर करीब 50 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज कराया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुर्गेश कुमार सिंह के अनुसार, इस मामले में भी सीजेएम कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी है। यहां भी इसी तरह फर्जी सड़क हादसे और कागजी मौत की कहानी गढ़ी गई थी।
SIT जांच की मांग
इस बड़े घोटाले को देखते हुए पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर एसआईटी (SIT) जांच की मांग की गई है, ताकि इस गिरोह में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके। कोतवाली पुलिस अब आशुतोष को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
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