हेमंत शर्मा, इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के बीए और बीएससी फर्स्ट ईयर के रिजल्ट को लेकर उठे सवालों के बाद अब विश्वविद्यालय ने जांच का फैसला लिया है। खराब परिणाम को लेकर छात्रों की आपत्तियों के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा सैंपलिंग कराई जाएगी। इसके लिए फर्स्ट ईयर की चुनिंदा कॉपियां विशेषज्ञों से दोबारा जांचवाई जाएंगी। Indoreविश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक जांच सिर्फ परीक्षा पैटर्न में बदलाव तक सीमित नहीं रहेगी। रिजल्ट खराब होने के पीछे अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल की जाएगी। विश्वविद्यालय का दावा है कि करीब दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
दो हजार से ज्यादा छात्र हिंदी-अंग्रेजी में फेल
बीए और बीएससी फर्स्ट ईयर के परिणाम में हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों में दो हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के फेल होने की बात सामने आई है। वहीं मल्टीडिसिप्लिनरी, भारत बोध और वोकेशनल जैसे विषयों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी असफल हुए हैं।खराब रिजल्ट सामने आने के बाद बुधवार को DAVV के नालंदा कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचे और परिणाम पर आपत्ति जताई।
40 फीसदी तक सिमटा ओवरऑल रिजल्ट
बताया गया कि बीए और बीएससी फर्स्ट ईयर का ओवरऑल रिजल्ट करीब 40 फीसदी रहा। इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।छात्रों की शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने अब विशेषज्ञों के जरिए उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है।
नए परीक्षा पैटर्न पर भी उठे सवाल
इस बार विश्वविद्यालय ने नए ऑर्डिनेंस के तहत परीक्षाएं कराई थीं। इसमें पेपर 100 नंबर का था और पास होने के लिए न्यूनतम 35 नंबर जरूरी थे। पहले की व्यवस्था में पेपर और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों को पास होने में राहत मिलती थी।नई व्यवस्था के कारण भी परिणाम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि विश्वविद्यालय अब यह जांच करेगा कि खराब रिजल्ट की असली वजह परीक्षा पैटर्न है या मूल्यांकन में कहीं गड़बड़ी हुई है।
कॉपी जांच पर भी उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को लेकर है। अगर विशेषज्ञों की दोबारा जांच में पहले मूल्यांकन से बड़े अंतर सामने आते हैं तो परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।विश्वविद्यालय अब चुनिंदा उत्तर पुस्तिकाओं की सैंपलिंग कराएगा और विशेषज्ञों से उनका मूल्यांकन कराया जाएगा। इसके बाद ही साफ होगा कि हजारों छात्रों के खराब परिणाम के पीछे असल वजह क्या रही।
दो सप्ताह में सामने आएगी तस्वीर
DAVV की ओर से कहा गया है कि सैंपलिंग और विशेषज्ञों की जांच के बाद करीब दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसके बाद विश्वविद्यालय यह तय करेगा कि परिणाम में सुधार की जरूरत है या मौजूदा रिजल्ट ही बरकरार रहेगा।फिलहाल छात्रों की नजर इस जांच पर है। अगर दोबारा मूल्यांकन में बड़ी खामियां सामने आती हैं तो सवाल सिर्फ छात्रों के रिजल्ट पर नहीं, बल्कि DAVV की पूरी परीक्षा और कॉपी जांच व्यवस्था पर खड़े होंगे।
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