Italy Over Extra Seats after Winning Election Controversy: पीएम मोदी की खास दोस्तों में से एक ईडली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) के लिए आज का दिन अग्निपरीक्षा वाला हो सकता है। दरअसल इटली में चुनाव जीतने पर एक्स्ट्रा सीटें मिलने वाले प्रस्ताव पर आज संसद में वोटिंग होनी है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार आज इटली की संसद (Italy Parliament) में यह प्रस्ताव पेश करेगी। इसके तहत चुनाव में जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में 105 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं। हालांकि इटली में चुनाव जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में एक्स्ट्रा सीटें देने के प्रस्ताव पर विवाद छिड़ गया है। विपक्ष ने इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया है।
इस कानून पर इटली पीएम मेलोनी ने साफ कहा है कि अगर कानून पास नहीं हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगी। ऐसे में इस वोटिंग को उनकी सरकार के लिए अहम माना जा रहा है।
दरअसल इटली की संसद में कुल 600 सीटें हैं। निचले सदन में 400 और सीनेट की 200 सीटें हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई पार्टी या गठबंधन कम से कम 42% वोट हासिल करके सबसे आगे रहता है तो उसे निचले सदन में 70 और सीनेट में 35 बोनस सीटें दी जाएंगी।ये सीटें कुल संख्या के अंदर ही बांटी जाएंगी। इसका मतलब यह नहीं है कि निचले सदन में 400 के ऊपर 70 सीटें जोड़ दी जाएंगी। कुल सीटें 400 ही रहेंगी। सरकार का कहना है कि इससे देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी और सरकारें बार-बार नहीं गिरेंगी। वहीं, विरोधियों का आरोप है कि इस कानून से चुनाव जीतने वाले गठबंधन को जरूरत से ज्यादा ताकत मिल जाएगी।
मान लीजिए चुनाव में
- पार्टी A के गठबंधन को 43% वोट मिले
- पार्टी B को 35% वोट मिले
- बाकी पार्टियों को 22% वोट मिले
अब नए नियम के तहत विजेता पार्टी A के गठबंधन को 70 सीटों का बोनस मिलेगा।
अगर सिर्फ आसान गणित लगाएं, तो 330 का 43% = 141.9 यानी करीब 142 सीटें।
फिर बोनस: 70 सीटें
कुल: लगभग 212 सीटें
पार्टी A को करीब 212 सीटें मिलेंगी। बाकी सीटें दूसरी पार्टियों के बीच बांटी जाएंगी। लेकिन वास्तविक चुनावी गणना इतनी सीधी नहीं है, क्योंकि सीटें अलग-अलग क्षेत्रों और पार्टियों की पात्रता के हिसाब से बांटी जाती हैं। साथ ही कानून में विजेता के लिए अधिकतम 220 सीटों की सीमा है।
विरोधियों ने कहा- इससे लोकतंत्र को खतरा
जॉर्जिया मेलोनी सरकार की इस प्रस्ताव का विपक्ष ने विरोध किया है। विरोधियों का कहना है कि अतिरिक्त सीटें मिलने से चुनाव जीतने वाले गठबंधन के पास संसद में जरूरत से ज्यादा ताकत आ सकती है। इससे वह दूसरे सांसदों से बातचीत किए बिना कई बड़े फैसले कर सकेगा। इनमें जजों और राष्ट्रपति की नियुक्ति जैसे अहम मामले भी शामिल हैं। इससे लोकतंत्र को खतरा है। वामपंथी विचारों वाले पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मासिमो जियानिनी ने इस कानून की तुलना 1923 में बने एक कानून से की। उस कानून ने उस समय नेशनल फासिस्ट पार्टी को संसद पर कब्जा करने में मदद की थी।
इटली में 80 साल में 68 सरकारें बनीं
बता दें कि इटली में सरकारों के अस्थिर रहने का लंबा इतिहास है। 1946 में इटली के गणराज्य बनने के बाद से अब तक वहां 68 सरकारें बन चुकी हैं। 1954 में एक सरकार तो सिर्फ 22 दिन चली थी। पिछले महीने जॉर्जिया मेलोनी ने एक रिकॉर्ड बनाया। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार इटली के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बनीं थीं। मेलोनी की मौजूदा सरकार का पांच साल का कार्यकाल अगले साल खत्म होना है।
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