कुमार इंदर, जबलपुर। सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जबलपुर की एक गरीब महिला नसबंदी ऑपरेशन करवाने के बावजूद तीसरी बार मां बन गई। पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और डॉक्टरों की अनदेखी ने उसकी जिंदगी मुश्किलों में डाल दी।
नसबंदी के बाद ठहरा गर्भ
जानकारी के मुताबिक बरगी हिल्स निवासी महिला ने जनवरी 2025 में जिला अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन करवाया था। ऑपरेशन के बाद महिला को भरोसा था कि अब वह दोबारा गर्भवती नहीं होगी, लेकिन कुछ समय बाद उसे गर्भ ठहरने का एहसास हुआ। इसके बाद उसने जांच करवाई तो रिपोर्ट में वह तीन महीने की गर्भवती निकली।
मजबूरी में महिला को तीसरे बच्चे को देना पड़ा जन्म
पीड़िता का आरोप है कि सोनोग्राफी रिपोर्ट दिखाने के बाद भी डॉक्टरों ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और उसे अस्पताल से चलता कर दिया। बाद में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में जांच के दौरान महिला को गर्भपात कराने की सलाह दी गई। महिला का कहना है कि गर्भपात के लिए वह महीनों तक अधिकारियों और डॉक्टरों के चक्कर लगाती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला। इसी भागदौड़ में गर्भ सात महीने का हो गया, जिसके बाद गर्भपात कराना संभव नहीं रहा। आखिरकार मजबूरी में महिला को तीसरे बच्चे को जन्म देना पड़ा।
सरकार से लगाई आर्थिक सहायता की गुहार
अब पीड़ित महिला ने मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आर्थिक सहायता देने की भी गुहार लगाई है। इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और परिवार नियोजन कार्यक्रम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

