मुख्यमंत्री उड़नदस्ता गुरुग्राम और कृषि विभाग की टीम ने नूंह के जलालपुर स्थित PACS खाद गोदाम पर संयुक्त छापेमारी की है। जांच में सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्टॉक के बीच कुल 890 यूरिया, डीएपी और एमओपी खाद के कट्टों का भारी अंतर पाया गया है।

सोनू वर्मा,नूंह। खरीफ सीजन के बीच किसानों के लिए आई खाद पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नूंह जिले के गांव जलालपुर स्थित PACS खाद गोदाम में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता (CM Flying) गुरुग्राम और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान खाद वितरण में कथित बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद स्टॉक के बीच 890 खाद के कट्टों का भारी अंतर मिलने से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। 1 जुलाई 2026 को हुई छापेमारी के दौरान जांच टीम ने गोदाम के स्टॉक रजिस्टर, बिल और पीओएस (POS) मशीन के रिकॉर्ड का बारीकी से मिलान किया।

सरकारी रिकॉर्ड में बड़ा खेल

जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड के अनुसार मौजूद होने चाहिए थे 700 बैग यूरिया (IFFCO), 140 बैग डीएपी (IFFCO) और 50 बैग एमओपी, लेकिन मौके पर यह स्टॉक उपलब्ध नहीं मिला। यानी कुल 890 खाद के कट्टों का हिसाब रिकॉर्ड में गड़बड़ पाया गया। जांच के दौरान गोदाम के सेल्समैन अबूल हसन से गायब स्टॉक के संबंध में पूछताछ की गई, लेकिन वह टीम को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद जांच दल ने गोदाम से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड कब्जे में लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी।

दोषी कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, पीओएस मशीन में दर्ज बिक्री और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान करने पर गंभीर विसंगतियां सामने आईं, जिससे खाद वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि किसानों के लिए आई खाद के वितरण में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है। जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है और दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

परेशान किसानों ने जताई चिंता

इस पूरे मामले ने खरीफ सीजन के बीच स्थानीय किसानों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्हें पहले ही सीजन में फसल के लिए खाद की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है, ऐसे में यदि सरकारी केंद्रों के रिकॉर्ड में ही ऐसा बड़ा खेल किया जाएगा तो सबसे बड़ा नुकसान सीधे तौर पर गरीब अन्नदाता को ही उठाना पड़ेगा। फिलहाल यह पूरा मामला उच्च अधिकारियों की सख्त निगरानी में जांच के अधीन है और इसका अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच व विभागीय कार्रवाई के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।