हेमंत शर्मा, इंदौर। एमपी के इंदौर में अन्नपूर्णा लिंक रोड के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम में जिस विकास की चर्चा होनी थी, वह मंच की व्यवस्था और राजनीतिक नाराजगी के शोर में दबती नजर आई। मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाले इस बड़े कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था को लेकर जिस तरह सवाल खड़े हुए, उसने महापौर की कार्यशैली को लेकर पहले से चल रही नाराजगी को और हवा दे दी।
आरोप है कि कार्यक्रम में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे को अपेक्षित अग्रिम स्थान नहीं दिया गया, जबकि नगर निगम की एमआईसी के सदस्यों को भी पीछे की पंक्ति में बैठाया गया। वरिष्ठ नेता शैलेंद्र बरुआ को लेकर भी बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठे। अब सवाल सिर्फ कुर्सियों का नहीं है। सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में पार्टी और निगम के वरिष्ठ नेताओं के प्रोटोकॉल का ध्यान आखिर किस स्तर पर रखा गया?
प्रदेश महामंत्री दूसरी पंक्ति में, एमआईसी तीसरी पंक्ति में क्यों?
कार्यक्रम में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे को पहली पंक्ति के बजाय दूसरी पंक्ति में स्थान दिए जाने की बात सामने आई। मंच पर उनकी बैठने की व्यवस्था को लेकर भी असहज स्थिति बनने की चर्चा रही।वहीं नगर निगम की एमआईसी, जो शहर की चुनी हुई निगम सरकार का अहम हिस्सा है, उसके सदस्यों को तीसरी पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर भी नाराजगी सामने आई।यही वह तस्वीर थी जिसने सवाल खड़ा कर दिया कि जब मंच पर मुख्यमंत्री मौजूद हों, तो क्या प्रदेश संगठन के महामंत्री के लिए प्रोटोकॉल के मुताबिक व्यवस्था नहीं होनी चाहिए थी?
वंदे मातरम् के बाद बदला माहौल, रणदिवे मंच से रवाना
कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम् के बाद प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे के कार्यक्रम से रवाना होने की घटना ने चर्चाओं को और तेज कर दिया।उनके मंच से चले जाने को कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नाराजगी से जोड़कर देखा। हालांकि इस घटनाक्रम के पीछे उनकी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन मौके पर उनकी मौजूदगी और उसके बाद रवाना होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जरूर गर्म हो गईं।
एमआईसी भी नाराज? महापौर की ‘अपनी टीम’ ही असहज!
महापौर के साथ नगर निगम चलाने वाली एमआईसी के सदस्यों को पीछे की पंक्ति में बैठाने की व्यवस्था ने भी नाराजगी को हवा दी। एमआईसी सदस्य सिर्फ पार्षद नहीं होते, बल्कि नगर निगम के अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रमुख जनप्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में उन्हें मंच पर अपेक्षित स्थान नहीं मिलने से महापौर और उनकी टीम के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यहीं से महापौर की कार्यशैली पर सबसे तीखा सवाल खड़ा होता है कि अगर अपनी ही एमआईसी के सदस्यों को मंच पर उचित सम्मान और स्थान नहीं मिलेगा, तो फिर नगर निगम की राजनीतिक टीम में समन्वय कैसे चलेगा?इसी नाराजगी के चलते कार्यक्रम में दूसरी एमआईसी की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में होने लगी। महापौर की कार्यशैली को लेकर एमआईसी सदस्यों के बीच असंतोष की बातें पहले भी उठती रही हैं और अब मंच की व्यवस्था ने उन चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है।
मालिनी गौड़ के क्षेत्र में स्थानीय नेताओं की अनदेखी पर भी सवाल
अन्नपूर्णा लिंक रोड क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़ के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा क्षेत्र है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायक समर्थकों की भूमिका भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण मानी जाती है।लेकिन स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपेक्षित तवज्जो नहीं मिलने की चर्चा ने नाराजगी को और बढ़ा दिया। कार्यकर्ताओं का सवाल है कि जिस क्षेत्र में विकास कार्य का इतना बड़ा कार्यक्रम हो रहा हो, वहां के स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व को मंच की व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान क्यों नहीं मिला?
विकास का मंच या महापौर की ब्रांडिंग का अखाड़ा?
अन्नपूर्णा लिंक रोड का कार्यक्रम शहर के लिए महत्वपूर्ण विकास कार्य से जुड़ा था। लेकिन आयोजन के बाद सड़क से ज्यादा चर्चा मंच की कुर्सियों की हो रही है।यही महापौर के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परेशानी है।जिस कार्यक्रम से नगर निगम को विकास का श्रेय मिलना था, उसी कार्यक्रम में अब महापौर की कार्यशैली, मंच व्यवस्था और वरिष्ठ नेताओं के साथ कथित समन्वय की कमी चर्चा में है। हवाबाजी के आरोपों से लेकर प्रोटोकॉल की अनदेखी तक, मंच ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री के सामने उठा सवाल- जिम्मेदारी किसकी?
मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में प्रोटोकॉल कोई मामूली औपचारिकता नहीं होती। प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, स्थानीय विधायक, नगर निगम के पदाधिकारी और एमआईसी सदस्यों की बैठने की व्यवस्था पहले से तय होती है।ऐसे में अगर प्रदेश महामंत्री को दूसरी पंक्ति में और एमआईसी सदस्यों को तीसरी पंक्ति में स्थान मिलने की स्थिति बनी, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या महापौर अपनी कार्यशैली में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें पार्टी प्रोटोकॉल, वरिष्ठ नेताओं के सम्मान और अपनी ही एमआईसी की नाराजगी की परवाह नहीं?मुख्यमंत्री के सामने मंच की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने महापौर के लिए असहज स्थिति जरूर पैदा कर दी है।अन्नपूर्णा लिंक रोड पर सड़क भले बन रही हो, लेकिन मंच पर उठे सवालों ने महापौर की राजनीति में एक नया गड्ढा जरूर खोल दिया है।
अब देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी संगठन और महापौर की ओर से क्या जवाब सामने आता है, क्योंकि मामला अब सिर्फ कुर्सी का नहीं, सम्मान, प्रोटोकॉल और महापौर की कार्यशैली से बढ़ती नाराजगी का बन चुका है।
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