जमशेदपुर। डुमरी विधायक जयराम महतो के खिलाफ बरवाअड्डा थाना प्रकरण और पुलिस एसोसिएशन के प्रस्तावित आंदोलन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड आंदोलनकारी और पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने पुलिस एसोसिएशन के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक विधायक की नहीं, बल्कि विधायिका के सम्मान और जनप्रतिनिधियों के अधिकार की है।
गुरुवार को सोनारी स्थित अपने आवासीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
‘थाने का CCTV खोल देगा पूरी सच्चाई’
शैलेंद्र महतो ने बरवाअड्डा थाने की घटना को लेकर कहा कि मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस एसोसिएशन की ओर से राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा को उचित नहीं बताया।
उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आंदोलन के नाम पर यदि पुलिस का काम प्रभावित होता है तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।
‘पुलिसिया राज की ओर बढ़ना ठीक नहीं’
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस एसोसिएशन का मौजूदा रवैया जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने जैसा है। उन्होंने एसोसिएशन से अपनी जिद छोड़कर जनसेवा पर ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस आंदोलन के कारण राज्य में कामकाज प्रभावित हुआ तो जनता इसका जवाब देगी और जरूरत पड़ने पर ‘झारखंड बंद’ का आह्वान किया जा सकता है।
सभी दलों के विधायकों से एकजुट होने की अपील
शैलेंद्र महतो ने राज्य के सभी राजनीतिक दलों के विधायकों से दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर इस मामले में आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज यदि एक विधायक के अधिकारों और सम्मान पर सवाल उठता है और इसे रोकने के लिए आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में यही स्थिति दूसरे जनप्रतिनिधियों के सामने भी आ सकती है।
CM और स्पीकर से हस्तक्षेप की मांग
पूर्व सांसद ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष की चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोनों से मामले में मध्यस्थता कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील विवाद को टकराव की स्थिति तक पहुंचने देने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए।
शैलेंद्र महतो ने झारखंड आंदोलन के दौर का जिक्र करते हुए पुलिस के कथित दमनकारी रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों और शहीदों ने जिस झारखंड की कल्पना की थी, उसमें जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए।पत्रकार वार्ता में पूर्व सांसद आभा महतो भी मौजूद थीं।



