विजय कुमार/जमुई/झाझा। दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के तहत कार्यरत आजीविका कर्मियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले 10 महीनों से मानदेय न मिलने से आक्रोशित जमुई और झाझा के दर्जनों कर्मियों ने मंगलवार को जिला पदाधिकारी (DM) को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। कर्मियों ने प्रशासन से अविलंब बकाया भुगतान करने और अपनी सेवा को नियमित करने की पुरजोर मांग की है।
आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश
आजीविका कर्मियों का आरोप है कि वे लंबे समय से वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहे हैं। कर्मियों ने बताया कि उनके द्वारा नगर परिषद से लेकर जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) कार्यालय तक कई बार गुहार लगाई गई लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। मौसम कुमारी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि वे कृष्णपट्टी, महिसौड़ी और पुरानी बाजार जैसे क्षेत्रों में पूरी निष्ठा से काम कर रही हैं लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण वे आज दाने-दाने को मोहताज हो गई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगर परिषद और DPM के बीच चल रही खींचतान में आजीविका कर्मियों का भविष्य और रोजी-रोटी दोनों पिस रहे हैं।
6100 रुपये प्रतिमाह पर निर्भरता और भुखमरी का खतरा
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन कर्मियों का मासिक मानदेय मात्र 6100 रुपये है। इतने कम वेतन के बावजूद पिछले 10 महीनों से इसका भुगतान न होना एक बड़ी मानवीय त्रासदी है। कर्मी अंजनी कुमारी ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण कई परिवार अब भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना उनके लिए असंभव हो गया है।
क्या है कर्मियों की मुख्य मांगें?
आजीविका कर्मियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- अविलंब भुगतान: पिछले 10 महीनों के लंबित बकाया मानदेय का तुरंत भुगतान सुनिश्चित हो।
- सेवा नियमितीकरण: वर्षों से कार्यरत इन कर्मियों की सेवाओं को नियमित किया जाए ताकि उन्हें भविष्य की सुरक्षा मिल सके।
ये कर्मी वर्षों से स्वयं सहायता समूहों के कुशल संचालन, महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, विभिन्न सर्वेक्षणों और जागरूकता अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बावजूद इसके उनकी अनदेखी करना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

