विजय कुमार/जमुई। जिले के बहुचर्चित दरोगा प्रभात रंजन हत्याकांड मामले में जमुई की अदालत ने एक कठोर और ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए न्याय की मिसाल पेश की है। अवैध बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के दौरान शहादत देने वाले दरोगा के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सुधीर सिन्हा की अदालत ने तीन मुख्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दोषियों को मिली कड़ी सजा
अदालत ने सुनवाई के दौरान ठोस साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कृष्ण दास, मिथिलेश ठाकुर और पवन दास को दोषी करार दिया। इन तीनों को उम्रकैद की सजा के साथ ही 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस मामले में शामिल अन्य तीन आरोपियों भुलिया उर्फ झुलिया, चिंता देवी और दशरथ दास को सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने (धारा 353) का दोषी मानते हुए दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह दर्दनाक घटना 14 नवंबर 2023 को जमुई जिले के गरही थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। उस समय दरोगा प्रभात रंजन खैरा प्रखंड के गरही थाना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। क्षेत्र में चल रहे अवैध बालू खनन और तस्करी के खिलाफ पुलिस प्रशासन लगातार अभियान चला रहा था। घटना की रात जब प्रभात रंजन अपनी टीम के साथ बालू माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करने पहुंचे तो बेखौफ तस्करों ने बालू लदे ट्रैक्टर से कुचलकर उनकी निर्मम हत्या कर दी।
कानून व्यवस्था की जीत
इस घटना ने न केवल जमुई जिले को, बल्कि पूरे बिहार पुलिस बल को गहरा सदमा पहुंचाया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इसे स्पीडी ट्रायल के तहत चलाया। महीनों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद बुधवार को आया यह फैसला बालू माफियाओं के लिए एक कड़ा संदेश है।
अदालत के इस फैसले से स्थानीय लोगों और पुलिस महकमे में संतोष है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय उन सभी जांबाज पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाएगा, जो अपनी जान की परवाह किए बिना अपराधियों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ लड़ते हैं। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में आम जनमानस के भरोसे को और मजबूत करता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध का अंत निश्चित है।

