जमुई। जिले से स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि उन्हें अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस का ईंधन रास्ते में ही खत्म हो गया। दो घंटे तक मरीज बीच सड़क पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ता रहा, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने उनकी सांसें तोड़ दीं।

​इलाज के लिए किया गया था पटना रेफर

​झाझा प्रखंड के बाबूबांक निवासी धीरज रविदास को गुरुवार सुबह सिर में तेज दर्द की शिकायत हुई। परिजनों ने उन्हें तुरंत झाझा अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें सुबह 9 बजे सदर अस्पताल जमुई भेज दिया गया। दोपहर करीब 12:15 बजे डॉक्टरों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया।

​सफर के बीच में थमे एंबुलेंस के पहिए

​मरीज को सरकारी एंबुलेंस (संख्या 6631) से पटना ले जाया जा रहा था। सफर शुरू हुए अभी एक घंटा ही बीता था कि दोपहर 1:11 बजे सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग पर मतासी गांव के पास एंबुलेंस अचानक रुक गई। चालक ने बताया कि गाड़ी का तेल खत्म हो चुका है। तेज धूप और बिना किसी चिकित्सकीय सहायता के बुजुर्ग मरीज एंबुलेंस के अंदर ही दो घंटे तक तड़पता रहा। चालक ने आसपास के पेट्रोल पंपों पर दौड़-भाग की, लेकिन उसे तेल नहीं मिला।

​दो घंटे की देरी बनी मौत का कारण

​सूचना के बाद जमुई से दूसरी एंबुलेंस भेजी गई, जिसे मौके पर पहुंचने में 2 घंटे 14 मिनट लग गए। परिजनों का आरोप है कि इस लंबी देरी के कारण मरीज ने दम तोड़ दिया। मृतक के पुत्र अजीत दास ने बताया कि चालक उन्हें गुमराह करता रहा, जबकि मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। शाम 4:15 बजे जब उन्हें वापस सदर अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

​अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास

​इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मामले में हैरानी की बात यह है कि जहां एसीओ नीतीश कुमार ने तेल खत्म होने और पंप पर उपलब्धता न होने की बात स्वीकार की है, वहीं जिले के सिविल सर्जन अशोक कुमार ने ऐसी किसी भी जानकारी से इनकार करते हुए लापरवाही को छुपाने की कोशिश की। यह घटना स्पष्ट करती है कि आपातकालीन सेवाओं के रखरखाव में कितनी बड़ी चूक हो रही है।