The darkest hour is just before the dawn… आशा, धैर्य और नई शुरुआत का प्रतीक है “भोर का तारा”. भोर होने से ठीक पहले जब रात का अंधकार गहनतम होता है तब दिखाई देता है क्षितिज पर भोर का पहला तारा. प्रकृति अपने क्रियाकलापों से सभी जीवधारियों को जीवन के संबंध में मूक इशारे करती हैं. सबसे अंधेरी रात के बाद खिलने वाला चमकदार सवेरा इस बात की ओर ईशारा है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां स्थायी नहीं हैं. विपरीत परिस्थितियों मे मिलने वाली दुःख- तकलीफ और भीतर तक तोड़ कर रख देने वाली असफलता, वही तमस है जिसके पीछे-पीछे चलकर जीवन मे सुख, शांति, समृद्धि और सफलता, भोर का तारा बनकर आती है. ऐसा समझिए गहरा अंधकार प्रखर उजाले की तैयारी है. रात की कालिमा सुबह के उजाले का स्वागत द्वार है.
मनुष्य के जीवन में कई बार परिस्थितियाँ इतनी कठोर आती हैं कि वह नैराश्य मे डूब जाता है मगर ऐसे समय मे बहुत आवश्यक है कि धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखें क्योंकि इस गहरे अंधेरे के बाद जीवन में सफलता का सूर्योदय होता ही है. प्रकृति की प्रवृत्ति को देखकर और उसे समझ कर इस बात का भरोसा रखें कि रात कितनी भी काली और लंबी क्यों न हो, सूर्य का उदय निश्चित है.
श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के पांचवें श्लोक- उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्. आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥ में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को अपने मन या बुद्धि के द्वारा अपना उद्धार करना चाहिए और खुद का पतन होने से बचाए रखना चाहिए, इंसान का मन ही उसका अपना मित्र और शत्रु होता है.
भोर का तारा हमें यही सिखाने आता है कि निराशा के क्षणों में भी सफलता और सुख के सपने सँजोकर रखें . जीवन मे भोर का तारा उदित होने के बाद जब दैवीय कृपा बरसती है तब आपको सुखद स्वप्न संजोने का भी अवसर नहीं मिलेगा तब उन्हीं सपनों को साकार करना होगा जो पहले ही देख रखा हो. चुनौती का मुखौटा डालकर जब अवसर आए तो उसका स्वागत कीजिए. तूफ़ान चाहे कैसा भी हो आस का दीया बुझना नहीं चाहिए क्योंकि ईश्वर की कृपा, सत्कर्म और निरंतर प्रयास अंततः जीवन को उजाले से भरता ही है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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