कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण और फंडिंग पर सवाल उठाने वाली चिट्ठी पर वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे की ओर से उठाए गए सवालों पर सियासी घमासान तेज हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मोस्ट एडवोकेट महेश जेठमलानी ने कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सवालों पर संवैधानिक पहलू की जानकारी दी है.

इसके जवाब में प्रियांक खरगे ने भी पलटवार करते हुए महेश जेठमलानी को ‘उपदेश देने’ से पहले असली सवालों का जवाब देने की नसीहत दी.

कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रजिस्ट्रेशन के बारे में पूछकर संगठन के कानूनी औचित्य पर भी सवाल उठाया था. कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे की ओर से मोहन भागवत को लिखे गए खुले पत्र को वंशवादी सोच बताया.

वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने भेजे गए पत्र के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि संविधान, मंत्री पद हासिल करने के बाद प्रियांक खरगे को अपनी मर्जी के हिसाब से कानून बदलने का अधिकार नहीं देता है.

प्रियांक खरगे ने पत्र के माध्यम से RSS के रजिस्ट्रेशन, फंडिंग और हिसाब-किताब के बारे पारदर्शी तरीके से जानकारी देने की मांग की थी. हालांकि मोहन भागवत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे को कहा कि हिंदू होने के लिए किसी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है.

महेश जेठमलानी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खरगे ने लिखा कि RSS पर अब ‘कानूनी विद्वानों’ की बहस भी शुरू हो गई है. उन्होंने ने आगे कहा कि अगर महेश जेठमलानी RSS के अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि बनकर उनके कार्यालय आना चाहें तो वे उनके सवालों का जवाब दे सकते हैं.

प्रियांक खरगे ने आगे लिखा है कि वह कानून, संविधान, पारदर्शिता और जवाबदेही पर किसी भी मंच पर चर्चा के लिए तैयार हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उम्मीद है जेठमलानी की यह पोस्ट BJP या RSS के खाते में बिल नहीं होगी.

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