रणधीर परमार, छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से ऑनलाइन गेमिंग की खतरनाक लत (Gaming Addiction) का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जो सभी माता-पिता के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यहां सिविल लाइन थाना क्षेत्र के छत्रसाल नगर में PUBG और ऑनलाइन गेम के आदी एक 19 साल के युवक ने मां के समझाने पर गुस्से में आकर घर में रखी जानलेवा डाई पी ली। गंभीर हालत में परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर भागे, जहां डॉक्टरों की मुस्तैदी से उसकी जान तो बच गई है लेकिन हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

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पढ़ाई छूटी, दोस्तों से नाता टूटा, दिन-रात स्क्रीन पर टिकी थीं नजरें

पीड़ित जितेंद्र यादव जिसकी उम्र 19 वर्ष है, पिछले कई महीनों से PUBG और अन्य ऑनलाइन गेम्स का बुरी तरह आदी हो चुका था। परिजनों के मुताबिक जितेंद्र का पूरा दिन और रात सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन पर ही बीतता था।

गेम की लत इस कदर हावी थी कि उसकी पढ़ाई छूट गई, दोस्तों से मिलना-जुलना बंद हो गया और वह समय पर खाना-पीना तक भूल चुका था। परिवार वाले जब भी उसे गेम खेलने से मना करते या मोबाइल छोड़ने को कहते तो वह बेहद चिड़चिड़ा हो जाता और गुस्सा करने लगता था।

‘बेटा थोड़ा पढ़ाई भी कर ले’- बस इतनी सी बात पर उठा लिया आत्मघाती कदम

जितेंद्र के बड़े भाई ने रोते हुए कल रात की पूरी दास्तां बयां की। उन्होंने बताया कि कल रात मां ने जितेंद्र को लगातार गेम खेलते देख लिया। जिसके बाद उन्होंने बहुत ही प्यार से समझाया और सिर्फ इतना डांटा था कि ‘बेटा थोड़ा पढ़ाई भी कर ले।‘

बस मां की यही सीख पबजी के नशे में डूबे जितेंद्र को इतनी बुरी लग गई कि उसने आवेश में आकर घर में रखी हेयर डाई गटक ली। कुछ ही देर में जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और वह तड़पने लगा, तब परिजन उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक समय पर अस्पताल लाने से जितेंद्र की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है लेकिन अभी भी उसकी हालत स्थिर और नाजुक बनी हुई है।

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बेबस भाई की हाथ जोड़कर अपील- ‘बच्चों के दोस्त बनिए, डांटिए मत…’

अस्पताल के बाहर खड़े जितेंद्र के बड़े भाई गोविंद यादव ने समाज और सभी माता-पिता से हाथ जोड़कर एक बेहद भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी माता-पिता से प्रार्थना करता हूं कि अपने बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने के लिए उन्हें डांटिए मत, बल्कि उनसे बात करिए और उनके दोस्त बनिए। मोबाइल की लत को धीरे-धीरे छुड़ाइए। आज मेरा भाई तो डॉक्टरों की वजह से बच गया लेकिन गुस्से में आकर कोई और बच्चा ऐसा कदम ना उठा ले।

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