रोहित कश्यप, मुंगेली। पत्रकारिता लोकतंत्र का मजबूत प्रहरी है, लेकिन जब इसी पहचान की आड़ में कथित रूप से दबाव, वसूली, ब्लैकमेलिंग अथवा अन्य अनुचित गतिविधियों के आरोप सामने आने लगे तो सवाल पूरी मीडिया व्यवस्था की विश्वसनीयता का बन जाता है। मुंगेली जिले में इसी मुद्दे को लेकर अब पत्रकारों ने प्रशासन और पुलिस तक अपनी आवाज पहुंचाई है।

मुंगेली प्रेस क्लब के बैनर तले पत्रकारों ने पत्रकारिता की आड़ में कथित रूप से अवैध वसूली और अन्य गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर तीन अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। प्रेस क्लब अध्यक्ष अनिल सोनी के संयोजन में पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से मिला और पत्रकारिता की विश्वसनीयता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सामने रखा।

सत्यापन और वेरिफिकेशन की मांग

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम पहला ज्ञापन एडीएम निष्ठा पाण्डेय तिवारी को सौंपा गया। इसमें पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता निर्धारित करने की मांग की गई। प्रेस क्लब का कहना है कि वर्तमान समय में पत्रकारिता अथवा डिजिटल मीडिया से जुड़ने के लिए कोई स्पष्ट न्यूनतम योग्यता और एक समान सत्यापन व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार ऐसे लोग भी मीडिया के नाम से सक्रिय हो जाते हैं, जिनकी कार्यप्रणाली से पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। एडीएम को ही सौंपे गए दूसरे ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग की पत्रकार सूची के सत्यापन और पुलिस वेरिफिकेशन की मांग की गई।

कथित ब्लैकमेलिंग और दबाव की जांच की मांग

तीसरा ज्ञापन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम एडिशनल एसपी प्रशांत शुक्ला को सौंपा गया। इसमें कुछ तथाकथित पत्रकारों पर जिले के पत्रकारों और अधिकारियों के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल करने, दबाव बनाने और कथित रूप से ब्लैकमेलिंग करने के आरोप लगाए गए हैं। प्रेस क्लब ने पुलिस से मांग की है कि शिकायत में बताए गए मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाया जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

‘कलम’ की ताकत जनहित के लिए हो, निजी हित के लिए नहीं

प्रेस क्लब से जुड़े पत्रकारों ने कहा कि वे पत्रकारिता की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, लेकिन स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और जवाबदेही भी जरूरी है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित के मुद्दों को सामने लाना, आम लोगों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और व्यवस्था को जवाबदेह बनाना है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति मीडिया की पहचान का इस्तेमाल निजी हित, अनुचित दबाव अथवा कथित वसूली जैसे मामलों के लिए करता है तो उसका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी पत्रकार बिरादरी की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

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