पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश महावीर सिंह सिंधु का उनके पैतृक गांव मसूदपुर में पूरे राजकीय सम्मान और नम आंखों के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

हांसी। क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पैतृक गांव मसूदपुर में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश महावीर सिंह सिंधु को बेहद नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। करीब 59 वर्षीय दिवंगत न्यायाधीश सिंधु का अंतिम संस्कार उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप गांव में स्थित उनके निजी खेत में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया गया। इस अत्यंत दुखद अवसर पर न्यायपालिका, जिला प्रशासन, राजनीतिक क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों समेत बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। मालूम हो कि न्यायमूर्ति महावीर सिंह सिंधु का रविवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया था, जिससे पूरे कानूनी जगत और Justice Mahavir Singh Sindhu funeral स्थल पर शोक की लहर दौड़ गई।

मातमी धुन के साथ दी गई अंतिम सलामी

सोमवार को आयोजित अंतिम संस्कार के दौरान हरियाणा पुलिस की विशेष टुकड़ी ने मातमी धुन बजाकर दिवंगत न्यायमूर्ति को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अपनी अंतिम सलामी दी। इसके बाद उनके सुपुत्र समृद्ध सिंह सिंधु ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्मों को पूरा किया। इस भावुक कर देने वाली अंतिम यात्रा में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा सहित कई वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हुए। इसके साथ ही हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा, स्थानीय विधायक विनोद भयाना, उपायुक्त राहुल नरवाल और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।

किसान परिवार से उच्च न्यायालय तक का सफर

न्यायमूर्ति महावीर सिंह सिंधु का जन्म 4 अप्रैल 1967 को मसूदपुर के एक बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय से प्राप्त की और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल कर वकालत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। वर्ष 2017 में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, जबकि साल 2018 में वे वहां स्थायी न्यायाधीश बने। अपनी व्यस्त न्यायिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे अपने पैतृक गांव और समाज से हमेशा गहराई से जुड़े रहे। एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश की प्रतिष्ठित न्यायपालिका के शीर्ष तक पहुंचने का उनका यह प्रेरक सफर युवा पीढ़ी का हमेशा मार्गदर्शन करता रहेगा।