प्रमोद कुमार, कैमूर। हम चांद पर कदम रख चुके हैं और विज्ञान के युग में जी रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे समाज के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास अपनी जड़ें कितनी मजबूती से जमाए हुए है, इसकी एक बानगी कैमूर जिले में देखने को मिली है। कैमूर पहाड़ी पर स्थित अधौरा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोहन्दी करर में दिनदहाड़े भूत घुसने की ऐसी अफवाह उड़ी कि तीन मासूम बच्चियां बेहोश हो गईं। इसके बाद जो हुआ, वह आधुनिक समाज के मुंह पर एक तमाचा है।
क्या है पूरा मामला?
एक सप्ताह पहले स्कूल में पढ़ाई के दौरान अचानक तीन बच्चियां बेहोश हो गईं। आनन-फानन में परिजन उन्हें घर ले गए। इसके बाद अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर ओझा को बुलाया गया और झाड़-फूंक का खेल शुरू हो गया। ओझा ने स्कूल में भूत होने का दावा कर दिया, जिसके बाद पूरे गांव के लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों की जिद थी कि जब तक स्कूल से भूत नहीं भगाया जाता, वे बच्चों को वहां कदम नहीं रखने देंगे।

गर्मी और बिजली का संकट बनी असली वजह
जब इस पूरी घटना की तह तक जाया गया, तो असलियत कुछ और ही निकली। यह स्कूल कैमूर पहाड़ी पर स्थित है, जहां बिजली और पंखे की कोई व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी और उमस के कारण बच्चों का दम घुटता है। स्कूल के शिक्षक जावेद अख्तर ने बताया कि गर्मी और घुटन की वजह से बच्चियां बेहोश हो रही हैं। शिक्षकों ने कई बार शिक्षा विभाग को लिखित आवेदन दिया, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जिला शिक्षा पदाधिकारी भी पहुंचे, पर सिर्फ औपचारिकता निभाकर चलते बने।
डॉक्टरों का खुलासा: कोई भूत नहीं, सिर्फ कमजोरी
शिक्षकों के काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन बच्चियों को अधौरा पीएचसी ले गए। वहां मेडिकल कैंप लगाकर इलाज किया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए भभुआ सदर अस्पताल भेजा गया।
सदर अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. भावना गुप्ता ने साफ किया कि यह पूरी तरह अंधविश्वास है। जांच में पाया गया कि तीनों बच्चियां शारीरिक रूप से काफी कमजोर हैं। डॉक्टरों ने उन्हें दवाएं दीं और स्कूल भेजने की सलाह दी। डॉ. गुप्ता ने कहा कि वे अपनी टीम के साथ गांव जाकर परिजनों को जागरूक करेंगी।
यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और गहरे बैठे अंधविश्वास का एक खतरनाक मिश्रण है, जहां बुनियादी सुविधाएं न मिलने पर लोग विज्ञान को छोड़ भूतों की कहानियां गढ़ने लगते हैं।


