महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण में महिला डॉक्टर से मारपीट के बहुचर्चित मामले में शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद रविवार को म्हात्रे ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। हाई कोर्ट ने उन्हें शाम 5 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्होंने अदालत के आदेश का पालन किया।
मजिस्ट्रेट कोर्ट की जमानत पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी
घटना के बाद कल्याण मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रमेश म्हात्रे को जमानत दे दी थी। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने टिप्पणी की कि मामले को “बेहद हल्के तरीके से” लिया गया।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए रमेश म्हात्रे को तत्काल आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 6 जुलाई को कल्याण के एक अस्पताल में हुई थी। आरोप है कि रमेश म्हात्रे अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और एक महिला डॉक्टर के साथ मारपीट तथा धक्का-मुक्की की।
जानकारी के अनुसार, डॉक्टरों ने NICU (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण एक नवजात शिशु को भर्ती करने से इनकार कर दिया था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर पार्षद व उनके समर्थकों ने अस्पताल में हंगामा किया।
वीडियो आया सामने, FIR दर्ज
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें रमेश म्हात्रे और उनके समर्थकों को डॉक्टरों के साथ धक्का-मुक्की करते देखा गया। मामले में पुलिस ने रमेश म्हात्रे समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्यभर में चिंता जताई गई और चिकित्सा संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
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