स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में कानपुर की रैंकिंग 5वें से गिरकर 11वें स्थान पर पहुंच गई है. वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर निगम ने IIT कानपुर की संस्था ऐरावत फाउंडेशन के साथ करार किया है.

कानपुर. केंद्र से जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की रिपोर्ट में औद्योगिक नगरी कानपुर की रैंकिंग 5वें से खिसककर 11वें स्थान पर पहुंच गई है. शहर में सड़कों और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को वायु गुणवत्ता प्रभावित होने की वजह माना जा रहा है.

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने भी माना कि निर्माण और सड़कों की धूल से हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. अब नगर निगम ने आगामी साल में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहतर करने के लिए IIT कानपुर की संस्था ऐरावत फाउंडेशन के साथ करार किया है.

छह साल का AQI

पिछले छह सालों में शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स इस प्रकार रहा है.

सालएयर क्वालिटी इंडेक्स
2020149
2021150
2022133
2023118
2024118
2025138

सभी आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दिए गए हैं.

पहली बार हुए इस करार के तहत शहर में 150 से अधिक स्थानों पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) आधारित लो कॉस्ट एयर क्वालिटी सेंसर्स लगा दिए गए हैं. इन सेंसर से कुछ देर में ही नगर निगम के अफसरों को यह जानकारी मिल जाएगी कि किस चौराहे पर हवा जहरीली हो रही है और उसका क्या कारण है.

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा कि आगामी तीन से चार महीने में स्थिति काफी हद तक सुधार लेंगे. इसके लिए बाकायदा एक पोर्टल तैयार कराया गया है, जिसमें हर दिन वायु प्रदूषण के स्तर का डाटा सामने आता है.

एयर क्वालिटी के मानक

वैल्यूकैटेगरी
0-50अच्छा
51-100संतोषजनक
101-200मध्यम
201-300खराब
301-400बहुत खराब
401-500गंभीर


कई शहरों में काम

ऐरावत फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था की ओर से लखनऊ, दिल्ली समेत कई अन्य शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहतर करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

सेंसर से जैसे ही यह डिटेक्ट होगा कि कहीं कूड़ा जलाया जा रहा है या बहुत अधिक धूल उड़ रही है, तो ऑटोमैटिक मैसेज संबंधित विभाग के अफसरों तक पहुंच जाएगा. इससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकेगा.

प्रदूषण के प्रमुख कारण

शहर में बिगड़ती सेहत के पीछे प्रमुख कारणों में विभिन्न स्थानों पर चल रहे बेतरतीब सड़क व सीवर निर्माण कार्यों से उड़ती धूल शामिल है. प्रमुख मार्गों पर खुली व फैली पड़ी निर्माण सामग्री भी इसकी वजह है.

निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव न होने और मलबे को खुला छोड़ने से धूल उड़ती है. इसके अलावा बिना हरा पर्दा लगाए निर्माण कार्य होना और खुले में कूड़ा जलाने से हवा में जहर घुलना भी प्रमुख कारण हैं.