चंडीगढ़। हरियाणा के चर्चित करनाल रिश्वत कांड में फंसे पूर्व तहसीलदार राजबख्श की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की रजिस्ट्री और एनओसी (NOC) जारी करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत लेने के मामले में अब राजबख्श पर धन-शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राजबख्श के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है.

विभाग की हरी झंडी के बाद कोर्ट में तय होंगे आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस साल फरवरी महीने में पंचकूला स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पूर्व तहसीलदार राजबख्श और तत्कालीन जिला नगर योजनाकार (DTP) विक्रम कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, संबंधित विभाग से आधिकारिक अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) लंबित होने के कारण कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय नहीं हो पा रहे थे.

अब विभाग से मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और ED इस मामले में कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ा सकेंगी. इसके साथ ही, विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा को भी गवाहों की सूची में शामिल करने की अर्जी को अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

₹5 लाख की रिश्वत से खुला था भ्रष्टाचार का यह खेल

यह पूरा मामला साल 2022 का है, जब स्टेट विजिलेंस ब्यूरो (अब एंटी करप्शन ब्यूरो) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करनाल के तत्कालीन डीटीपी (DTP) विक्रम कुमार और उनके ड्राइवर बलवीर को ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी के बाद जब डीटीपी के ठिकानों पर छापेमारी की गई, तो वहां से करीब ₹85 लाख की भारी-भरकम नकदी बरामद हुई थी.

विजिलेंस की कड़ी पूछताछ में आरोपी डीटीपी ने खुलासा किया था कि बरामद की गई रकम में से ₹14.50 लाख की राशि एनओसी क्लियरेंस के एवज में तहसीलदार राजबख्श से मिली थी. इसी खुलासे के आधार पर विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए 15 मार्च 2022 को तहसीलदार राजबख्श को भी गिरफ्तार कर लिया था.

ED ने जब्त की थी ₹4.59 करोड़ की संपत्ति

विजिलेंस की शुरुआती जांच के बाद मामले की गंभीरता और अवैध कमाई के बड़े नेटवर्क को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस केस को अपने हाथ में लिया और दोनों अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. ED की जांच में सामने आया कि दोनों अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति खड़ी की थी.

केंद्रीय एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की और ₹4.59 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त (Attach) कर लिया था. ED के मुताबिक, इस पूरी संपत्ति में से करीब ₹3.75 करोड़ की अचल संपत्तियां पूरी तरह से अवैध और रिश्वत की कमाई से अर्जित की गई थीं.

दूसरे आरोपी पर फैसला आना अभी बाकी

जहां एक तरफ विभाग ने पूर्व तहसीलदार राजबख्श के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है, वहीं इसी मामले के सह-आरोपी तत्कालीन डीटीपी विक्रम कुमार के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला अभी भी संबंधित विभाग के पास लंबित है. जांच एजेंसियों का मानना है कि राजबख्श के खिलाफ मिली इस मंजूरी से केस को कोर्ट में मजबूती मिलेगी और अवैध कॉलोनियों के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाले गठजोड़ पर कानून का शिकंजा और कड़ा होगा.