करनाल में आयोजित जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने 12 महत्वपूर्ण जनशिकायतों पर सुनवाई कर उनका त्वरित समाधान किया।

सुमन चौहान,करनाल। जिला स्थित स्थानीय पंचायत भवन में आज जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक का आधिकारिक रूप से आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गरिमामयी अध्यक्षता हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी तथा मत्स्य पालन कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा द्वारा की गई। इस जनसुनवाई कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की रोजमर्रा की बुनियादी शिकायतों का प्रशासनिक स्तर पर त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करना है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पीड़ित लोगों को समय पर उचित न्याय और राहत मिल सके। बैठक में जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के सभी विभागाध्यक्ष अनिवार्य रूप से मौजूद रहे।

सात मामलों का मौके पर समाधान

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस विशेष बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित कुल 12 जटिल शिकायतों और लंबित मामलों पर गहन सुनवाई की गई। इन कुल मामलों में 5 पुराने पेंडिंग और 7 बिल्कुल नए मामले शामिल किए गए थे, जिनमें से 7 संवेदनशील मामलों का कैबिनेट मंत्री की मौजूदगी में मौके पर ही अंतिम निपटारा कर दिया गया। जनसुनवाई के दौरान प्रत्येक शिकायत पर दोनों पक्षों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद, मंत्री श्याम सिंह राणा ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को जवाबदेही तय करते हुए शेष मामलों के समाधान के लिए कड़े आवश्यक निर्देश दिए। इसके साथ ही, गांव-गांव तक कृषि टीमों और वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) और पीएम-किसान सम्मान निधि जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है।

गिरते भूजल स्तर पर गहरी चिंता

कष्ट निवारण बैठक के इतर, वर्तमान में हरियाणा और पंजाब दोनों ही राज्यों में भूजल (Groundwater) का स्तर लगातार बेहद तेजी से नीचे खिसकना एक बड़ा चिंताजनक मुद्दा बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और कुरुक्षेत्र जैसे जिले इस जल संकट का सबसे बुरा पर्यावरणीय प्रभाव झेल रहे हैं, जहां महेंद्रगढ़ के कुछ ब्लॉकों में पानी 52 मीटर नीचे चला गया है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार द्वारा किसानों को पारंपरिक धान के स्थान पर मक्का, कपास और दलहन जैसी कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक राजनीतिक टिप्पणी का जवाब देते हुए ‘हरियाणा का जमाई’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को पारिवारिक मर्यादा के खिलाफ बताया और कहा कि आज जल संरक्षण के लिए कई नई उन्नत टेक्नोलॉजी आ चुकी हैं, जिसकी सच्चाई से सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं।