सुमन शर्मा/ कटिहार। जिले के नगर थाना क्षेत्र स्थित गामी टोला में प्रशासन द्वारा चलाए गए बुलडोजर अभियान ने अब एक बड़ा राजनीतिक और मानवीय संकट पैदा कर दिया है। 8 एकड़ 56 डिसमिल जमीन को खाली कराने की नीयत से की गई इस कार्रवाई के बाद 57 परिवार अचानक बेघर हो गए हैं। भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे अपने बच्चों के साथ रह रहे इन परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय है।
पप्पू यादव का दौरा और प्रशासन पर सवाल
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने गामी टोला पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। स्थानीय लोगों ने सांसद के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें अपना घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। बुजुर्गों और महिलाओं ने रोते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और देखते ही देखते उनकी वर्षों की जमा-पूंजी और आशियाना मलबे में तब्दील हो गया।
सांसद पप्पू यादव ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए इसे ‘गरीब विरोधी’ कार्रवाई करार दिया। उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन प्रशासन को गरीबों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले को लेकर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से उनकी बात हुई है। साथ ही, उन्होंने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि अब इस लड़ाई को न्यायालय के माध्यम से लड़ा जाएगा और वे हर कदम पर उनके साथ खड़े रहेंगे।
मानवीय बनाम प्रशासनिक संघर्ष
यह घटना अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है। एक ओर प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या पुनर्वास की व्यवस्था के बेदखल किया गया।
कटिहार के गामी टोला का यह मुद्दा अब बिहार की सियासत में भी गर्मी पैदा कर रहा है। भविष्य में यह घटना प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच एक लंबी कानूनी खींचतान का कारण बन सकती है। फिलहाल, पीड़ितों की निगाहें अब सांसद के आश्वासन और अदालती रुख पर टिकी हैं, जबकि पूरा इलाका इस दर्दनाक घटना को लेकर गहरे आक्रोश में है।

