अनूप दुबे, कटनी। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील से आदिवसियों के जल-जंगल-जमीन पर डाका डालने का संगीन मामला सामने आया है। ग्राम भटगंवा के जंगलों पर दूसरे जिलों के भू-माफिया और रसूखदार अवैध कब्जा कर रहे हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन और वन विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। पीड़ित आदिवासी ग्रामीणों द्वारा लगातार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

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आदिवासियों की चीखें नहीं पहुंच रही अधिकारियों तक

शिकायत के मुताबिक ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम भटगवां के अंतर्गत आने वाले लगभग 50 हेक्टेयर वन भूमि पर जबलपुर और मंडला जिले के बाहरी लोगों द्वारा धड़ल्ले से कब्जा किया जा रहा है। बाहरी अतिक्रमणकारी हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटकर वहां जबरन खेती कर रहे हैं।

थाने का घेराव और ‘कागजी आश्वासन’… 4 हफ्ते बाद भी जीरो कार्रवाई क्यों

अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि स्थानीय आदिवासियों को अपनी ही जमीन बचाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। कार्रवाई न होने से नाराज भटगवां गांव के आदिवासी ग्रामीणों ने पिछली 17 जून को उमरिया पान थाने का घेराव किया था।

उस वक्त प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश देते हुए जल्द ही जंगल को अतिक्रमण मुक्त कराने का लिखित-मौखिक आश्वासन दिया था। लेकिन 3 से 4 सप्ताह बीत जाने के बाद भी धरातल पर कार्रवाई शून्य है। आखिर अधिकारियों का वह आश्वासन सिर्फ मामला शांत कराने का एक ‘हथकंडा’ क्यों बनकर रह गया?

ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक पर गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक मुरारी पटेल की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि रोजगार सहायक द्वारा जबलपुर और मंडला से आए बाहरी अतिक्रमणकारियों के फर्जी तरीके से स्थानीय पते पर आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी दस्तावेजों के साथ बड़ा खिलवाड़ है।

एसडीएम दफ्तर के सामने उग्र आंदोलन की चेतावनी

कार्रवाई से निराश होकर आक्रोशित आदिवासी ग्रामीणों ने अनुविभागीय कार्यालय पहुंचकर एसडीएम के नाम तहसीलदार को एक बार फिर तीखा शिकायती पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया और रोजगार सहायक पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे एसडीएम कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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अधिकारियों का पक्ष

इस पूरे मामले पर तहसीलदार नितिन पटेल का कहना है कि ग्रामीणों से शिकायत प्राप्त हुई है। वन विभाग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी जा रही है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। वहीं रोजगार सहायक द्वारा बाहरी लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाने के मामले में जनपद सीईओ को पत्र लिखकर जांच कराई जाएगी। गांव की अन्य समस्याओं का भी जल्द निराकरण किया जाएगा।

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