कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर से पुलिस की संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। यहां बेलखेड़ा थाने में जानलेवा हमले के बाद मदद की गुहार लगाने आए एक गंभीर रूप से घायल युवक को इलाज देने के बजाय हवालात (लॉकअप) में बंद कर दिया गया। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण युवक की अस्पताल में मौत हो गई। इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस अधीक्षक (SP) ने दोषी सब-इंस्पेक्टर (SI) को निलंबित कर दिया है।
मदद मांगने थाने पहुंचा था पीड़ित
दरअसल पीड़ित युवक इंदल घोसी पर कुछ बदमाशों ने जानलेवा हमला किया था। खून से लथपथ और गंभीर हालत में इंदल अपने परिजनों के साथ न्याय की गुहार लगाने बेलखेड़ा थाना पहुंचा था। किसी भी सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को सबसे पहले घायल को अस्पताल पहुंचाना चाहिए था, लेकिन यहां कानून के रखवालों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर बलबीर सिंह ने गंभीर रूप से घायल इंदल की मदद करने या उनकी एफआईआर (FIR) दर्ज करने के बजाय, उन्हें ही लॉकअप में बंद कर दिया।
अस्पताल पहुंचने पर हुई मौत
लॉकअप के अंदर बंद गंभीर रूप से घायल इंदल की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। जब उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई और वह जिंदगी और मौत के बीच झूलने लगा, तब जाकर पुलिस ने आनन-फानन में उसे अस्पताल भेजा। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान इंदल घोसी ने दम तोड़ दिया।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
युवक की मौत के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा, तो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बेलखेड़ा थाने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले गए। फुटेज की जांच में यह साफ हो गया कि एएसआई बलबीर सिंह ने घोर लापरवाही और अमानवीयता बरतते हुए घायल को लॉकअप में बंद किया था। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद सब-इंस्पेक्टर बलबीर सिंह को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ और स्थानीय लोगों में पुलिस के इस रवैये को लेकर आक्रोश है।

