इमरान खान, खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक पुलिस आरक्षक द्वारा वर्दी में महिलाओं के साथ अश्लील वीडियो बनाने और चैट करने के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और खंडवा के पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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प्रियंक कानूनगो की पीठ ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि आरक्षक पर लगे गंभीर आरोपों की बारीकी से जांच कर अगले दो सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन (Action Taken Report – ATR) पेश किया जाए।

आयोग ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला पहली नजर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का प्रतीत होता है। इसके साथ ही शिकायत में पुलिस प्रशासन की ढीली कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए हैं कि इतने गंभीर और संवेदनशील आरोपों के बाद भी आरोपी आरक्षक को सिर्फ ‘लाइन अटैच’ कर खानापूर्ति क्यों की गई।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद तब गरमाया जब खंडवा जिले के खालवा थाने में पदस्थ आरक्षक अफराज मिर्जा पर पुलिस की वर्दी में अश्लील वीडियो बनाने और महिलाओं से जुड़े कथित अश्लील वीडियो, फोटो और चैट वायरल होने के गंभीर आरोप लगे। आरोप है कि कोतवाली थाने में पदस्थापना के दौरान आरक्षक ने अपने पद और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए कई महिलाओं और युवतियों को परेशान किया और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें जाल में फंसाया। शिकायतकर्ताओं ने कुछ महिलाओं को दबाव में रखने और ब्लैकमेल किए जाने की आशंका भी जताई थी।

थाने में सौंपा गया था पेन ड्राइव, लगा था ‘वर्दी जिहाद’ का आरोप

इस मामले को लेकर महादेवगढ़ मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल अपने समर्थकों के साथ कोतवाली थाना पहुंचे थे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को साक्ष्य के तौर पर एक पेन ड्राइव भी सौंपी थी, जिसमें कथित वीडियो और चैट रिकॉर्ड होने का दावा किया गया था। अशोक पालीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को “वर्दी जिहाद” से जुड़ा मामला बताते हुए मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की थी।

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सिटी एसपी कर रहे हैं जांच

शिकायत और भारी विरोध को देखते हुए पुलिस विभाग ने शुरुआती कदम उठाते हुए आरक्षक अफराज मिर्जा को लाइन अटैच कर दिया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) महेंद्र तारनेकर के मुताबिक प्राप्त शिकायत और चैट के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच सिटी एसपी (CSP) स्तर पर कराई जा रही है। अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एंट्री के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

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