हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासित पार्टी का नकाब एक बार फिर तार-तार हो गया है। सूबे के इंदौर में शनिवार की सुबह कोई सामान्य राजनीतिक सुबह नहीं थी। यह वह सुबह थी जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC) जीतू पटवारी के घर ‘अनुशासन और संगठन’ की आड़ में सियासत का घटिया और शर्मनाक अखाड़ा सजा। सूत्रों की मानें तो जिस घर से मध्य प्रदेश कांग्रेस को दिशा मिलनी थी, वहीं गुटबाज़ी के जुनून में नेताओं ने मर्यादा की तमाम हदें लांघ दीं।
सुबह 10 बजे का ‘संग्राम’: बंद कमरे में गाली-गलौज और हाथापाई
सूत्रों के हवाले से जो छनकर खबरें आ रही हैं, वे किसी भी राजनीतिक दल के लिए डूब मरने जैसी हैं। शनिवार सुबह करीब 10 बजे पटवारी के निवास पर एक बैठक बुलाई गई थी। मेज पर एजेंडा संगठन का था, लेकिन नियत में वर्चस्व की आग थी। बैठक में विधानसभा प्रभारी पिंटू जोशी, अमन बजाज, दीपू यादव, राजू भदोरिया, शैलेष गर्ग और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटामण (चिंटू) चौकसे मौजूद थे।फैसलों और टिकट/पद के फैसलों पर जैसे ही सवाल उठे, भद्र पुरुषों की यह बैठक गंदी गाली-गलौज में बदल गई। देखते ही देखते शब्दों के बाण लात-घूंसों में बदल गए।
दो गुटों में बंटी कांग्रेस: कुर्सी उठाने से लेकर ‘कुर्ता’ फटने तक का ड्रामा
घटनाक्रम की जो तस्वीरें सूत्रों के हवाले से सामने आ रही हैं, वे बेहद गंभीर हैं कुर्सी से हमले की कोशिश आरोप हैं कि शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे इतने आपे से बाहर हो गए कि उन्होंने पिंटू जोशी पर वार करने के लिए सीधे कुर्सी ही उठा ली।
दो आक्रामक गुट
एक तरफ पिंटू जोशी, अमन बजाज और दीपू यादव थे, तो दूसरी तरफ चिंटामण चौकसे, राजू भदोरिया और शैलेष गर्ग। धक्का-मुक्की और लात-घूंसों की इस नंगनाच में पूरी बैठक गुंडागर्दी का केंद्र बन गई।PCC चीफ का फटा कुर्ता! सबसे बड़ा और तीखा दावा सूत्रों का तो यह है कि बीच-बचाव करने उतरे खुद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी इस हिंसा की चपेट में आ गए और उनका कुर्ता तक फट गया।
फोन जब्त, ‘ऑल इज़ वेल’ का झूठा फोटो-शूट और CCTV का सच!
इस पूरे शर्मनाक अध्याय को दबाने के लिए शाम होते-होते जो ‘नाटकीयता’ रची गई, उसने कांग्रेस के दोहरे चरित्र को और उजागर कर दिया: मोबाइल फोन बंद कराए सूत्रों का दावा है कि विवाद शुरू होते ही नेताओं के फोन बंद या दूर रखवा दिए गए थे ताकि हिंसा की खबरें बाहर न निकल सकें। चेहरों की हवाइयां उड़ाती तस्वीरें मारपीट के बाद मामले को दबाने के लिए सभी नेताओं को एक साथ खड़ा कर ‘मुस्कुराता हुआ’ फोटो खिंचवाया गया। लेकिन तस्वीरों में दिख रहे नेताओं के सूजे और उतरे हुए चेहरे चीख-चीखकर अंदरूनी कलह की गवाही दे रहे थे।CCTV का सच आएगा बाहर?पटवारी के घर के चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरे लगे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष में इतना नैतिक साहस है कि वे इन CCTV फुटेज को सार्वजनिक करें या कम से कम हाईकमान को भेजें? या फिर सच को कालीन के नीचे छुपा दिया जाएगा?
दिल्ली तक पहुंची गूंज, लेकिन ‘आधिकारिक मौन’ क्यों
खबर है कि कांग्रेस के ही एक पूर्व प्रवक्ता ने इस ‘कुर्ताफाड़’ कांड की पूरी रिपोर्ट AICC प्रभारी हरीश चौधरी तक पहुंचा दी है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि चौतरफा थू-थू होने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व और खुद जीतू पटवारी मौन साधकर बैठे हैं।
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