किशनगंज। जिले में लगातार हो रही बारिश ने शहर के विकास दावों की पोल खोल दी है। जिले के पश्चिमपाली इलाके में जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि प्रमुख मार्ग पर जलभराव के कारण लोगों का आना-जाना तक दूभर हो गया है।
मुख्य मार्ग पर घुटनों तक भरा पानी
किशनगंज के पश्चिमपाली इलाके की मुख्य सड़क पर घुटनों तक गंदा पानी जमा हो गया है। यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जिले के सातों प्रखंडों को आपस में जोड़ने का काम करता है। सड़क पर पानी भर जाने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा साबित हो रहा है।
अनियोजित निर्माण: ऊंची नालियां और जलभराव
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में जल निकासी की कोई ठोस और समुचित व्यवस्था नहीं है। सड़क की तुलना में नालियों का निर्माण ऊंचा कर दिया गया है, जिसकी वजह से बारिश का गंदा पानी नालियों के अंदर जाने के बजाय सीधे सड़क पर फैल जाता है। हर साल बरसात के मौसम में यही दृश्य देखने को मिलता है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद की सुस्ती के चलते आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
दुकानदारों को झेलना पड़ रहा आर्थिक नुकसान
सड़क पर जलभराव का असर केवल यातायात पर ही नहीं पड़ रहा है, बल्कि सड़क किनारे बनी व्यावसायिक दुकानों में भी बारिश और नाले का गंदा पानी घुस रहा है। दुकानदारों का कहना है कि जलजमाव के कारण उनकी दुकानें लंबे समय तक बंद रहती हैं या ग्राहक आ नहीं पाते, जिससे उन्हें हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
समाजसेवी का अनोखा विरोध प्रदर्शन
इस विकट समस्या के खिलाफ आवाज उठाते हुए स्थानीय समाजसेवी इम्तियाज नसर ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने जलभराव से भरी मुख्य सड़क के गंदे पानी में बैठकर स्नान किया और इस तरह नगर परिषद तथा जिला प्रशासन के प्रति अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंदे पानी और जनता के दर्द को खुद महसूस नहीं करेंगे, तब तक जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होगा।
नगर परिषद की कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि शहर के विकास के नाम पर बड़े-बड़े दावे और वादे किए जाते हैं, लेकिन थोड़ी सी बारिश होते ही प्रशासन के सारे दावे धरे के धरे रह जाते हैं और हकीकत सामने आ जाती है। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही जल निकासी की इस समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला, तो वे व्यापक आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।



