आरजी कर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के पूर्व वित्तीय और प्रशासनिक विवादों में घिरे पूर्व प्रिंसिपल डा संदीप घोष की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने उनके खिलाफ एक बड़ा एक्शन लेते हुए उनके बेलीघाटा स्थित आवास के अवैध हिस्से को ढहाने का कड़ा निर्देश जारी किया है। यह कार्रवाई संदीप घोष और उनकी पत्नी संगीता घोष के संयुक्त मालिकाना हक वाली संपत्ति पर की जाएगी।

RG कर हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने बिल्डिंग रूल तोड़ने के आरोप में उनके घर के कथित तौर पर गैर-कानूनी हिस्सों को गिराने का ऑर्डर दिया है.

कोलकाता नगर निगम ने आरजी कर हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के घर की छत के एक हिस्से को गिराने का आदेश दिया है. आरोप है कि वह हिस्सा बिना इजाजत के बने हैं. घर के ओरिजिनल डिजाइन में उस हिस्से का जिक्र नहीं था. कोलकाता नगर निगम ने संदीप घोष के घर जाकर कंस्ट्रक्शन का इंस्पेक्शन किया था. नगर निगम ने कुछ साल पहले घर को नोटिस दिया था. इस बार, एक खास हिस्से को गिराने के लिए कहा गया था। गिराने का काम अगले 45 दिनों में पूरा करना होगा.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संदीप घोष वर्तमान में आरजी कर अस्पताल में हुए बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार (Financial Corruption Case) के एक मामले में न्यायिक हिरासत के तहत जेल की सजा काट रहे हैं। उन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पुख्ता सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया था।

नगर निगम द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा गया था कि बेलेघाटा के बदन रॉय लेन में स्थित संदीप घोष के मकान के तीन हिस्से बिना प्रशासनिक अनुमति के बनाए गए हैं, जिनमें से मुख्य हिस्से को ध्वस्त करना होगा। संदीप घोष और संगीता घोष पर बदन रॉय लेन (मकान नंबर 83) में ‘बिल्डिंग रूल्स 2009’ के सेक्शन 133 और 134 का खुला उल्लंघन करने का गंभीर आरोप है। नगर निगम ने सरकार के एक सदस्य से मिली लिखित शिकायत के आधार पर इस मामले की आंतरिक जांच की थी।

नगर निगम मुख्यालय में इस अवैध निर्माण को लेकर हुई आधिकारिक ट्रिब्यूनल सुनवाई में घर के मालिक (संदीप घोष का पक्ष) और शिकायत करने वाले दोनों ही पक्ष मौजूद थे। उस दौरान जेल जाने से पहले मालिक पक्ष ने दो महीने के अंदर उस अवैध ढांचे को स्वयं हटा लेने की लिखित सहमति जताई थी। लेकिन तय समय में ऐसा न होने के बाद अब नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम ऑर्डर जारी कर दिया है कि उस हिस्से को आगामी 45 दिनों के अंदर पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया जाए।

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