ODISHA DESK, भुवनेश्वर: राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में पारदर्शिता, एकरूपता और कार्यकुशलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने कर्मचारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन के लिए एक व्यापक और सख्त दिशानिर्देश जारी किया है।

राज्य के सामान्य प्रशासन और लोक शिकायत विभाग की ओर से 22 मई, 2026 को एक आदेश (पत्र संख्या: 16068(e)/Gen.) जारी कर मौजूदा ट्रांसफर पॉलिसी को दोहराने के साथ-साथ इसे और मजबूत किया गया है। सरकार ने विभिन्न विभागों में ट्रांसफर नियमों के पालन में आ रही विसंगतियों को दूर करने के लिए यह कदम उठाया है। इसके साथ ही, 18 अप्रैल 1967 के ‘बुक सर्कुलर नंबर 42’ के पालन पर भी जोर दिया गया है, जिसका अब तक समान रूप से पालन नहीं किया जा रहा था।

नई गाइडलाइन की प्रमुख बातें:

तबादले की समय-सीमा: सामान्य तौर पर हर साल 15 अप्रैल से 15 जून के बीच ही ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि इस अवधि के अलावा किसी अन्य समय में तबादला किया जाता है, तो इसके लिए उच्च अधिकारियों की मंजूरी अनिवार्य होगी।

कार्यकाल की अवधि: कोई भी अधिकारी एक स्टेशन पर 3 साल की अवधि पूरी करने के बाद स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
जिला और ब्लॉक सीमा:

ग्रुप ‘ए’ (Group A) और ग्रुप ‘बी’ (Group B) के अधिकारी किसी एक जिले में अधिकतम 6 वर्ष से अधिक समय तक नहीं रह सकते। इसी तरह ग्रुप ‘सी’ (Group C) कर्मचारियों के लिए भी एक ब्लॉक या तहसील में रहने की अधिकतम सीमा 6 वर्ष तय की गई है।

होम डिस्ट्रिक्ट पोस्टिंग पर रोक: नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अधिकारियों को उनके गृह जिले में, विशेष रूप से संवेदनशील पदों पर तैनात करने को हतोत्साहित किया गया है।

KBK क्षेत्र और सरकारी दंपतियों के लिए छूट: जिन अधिकारियों ने केबीके (KBK) क्षेत्र में 6 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, उनके गृह जिले में पोस्टिंग के लिए विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार के अधीन कार्यरत कामकाजी दंपतियों (पति-पत्नी) को व्यावहारिक होने पर एक ही स्थान या आसपास तैनात करने की व्यवस्था की गई है।

सचिवालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों के नियम: सचिवालय और विभिन्न विभागाध्यक्ष कार्यालयों में गैर-हस्तांतरणीय कैडर का कोई भी कर्मचारी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर एक सीट पर 3 साल से अधिक समय तक नहीं रहेगा।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ट्रांसफर ऑर्डर में कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने और नए स्थान पर ज्वाइन करने का विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। यदि किसी मामले में नियमों में ढील दी जाती है, तो जनहित को देखते हुए इसके लिए लिखित कारण बताना अनिवार्य होगा।

राज्य के सभी विभागों को इस नई नीति का कड़ाई से पालन करने और अपनी आंतरिक स्थानांतरण नीतियों को इसके अनुरूप संरेखित करने का निर्देश दिया गया है।

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