Dharm Desk – माहे मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी का आगाज हो गया. बुधवार 17 जून को मुहर्रम की पहली तारीख, जबकि 10 मुहर्रम यानी यौम-ए-आशूरा 26 जून, शुक्रवार को मनाया जाएगा. चांद दिखते ही मुस्लिम समुदाय में अकीदत और इबादत का माहौल बन गया है.

इमारत-ए-शरिया ने भी की पुष्टि
देश के विभिन्न हिस्सों से चांद देखे जाने की शहादतें मिली हैं. जिसके आधार पर 17 जून को 1 मुहर्रम 1448 हिजरी तय किया गया है. इसके साथ ही नए इस्लामी साल की शुरुआत हो चुकी है.
कर्बला की कुर्बानी की ताजा हुई याद
मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और इसकी सबसे अहम तारीख 10 मुहर्रम होती है. इसी दिन कर्बला के मैदान में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन रदियल्लाहु अन्हु और उनके साथियों ने सच्चाई और इंसाफ की राह में अपनी जान कुर्बान कर दी थी. उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है.
मजलिस और इबादत का सिलसिला शुरू
चांद नजर आते ही शिया समुदाय के घरों, मस्जिदों और इमामबाड़ों पर गम के प्रतीक काले झंडे लगाए गए है. वहीं, ‘जिक्रे शुहदाए कर्बला’ की मजलिसों का दौर भी शुरू हो गया है, जो 10 मुहर्रम तक जारी रहेगा. मस्जिदों और घरों में कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी और दुआ ख्वानी का आयोजन किया जा रहा है.
उलमा की अपील—अमन और इबादत पर दें जोर
उलमा किराम ने नए इस्लामी साल के मौके पर लोगों के लिए खैर व बरकत की दुआ की है. साथ ही अपील की है कि मुहर्रम के दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, रोजा रखें और अमन- ओ- अमान कायम रखें. खासकर आशूरा के दिन रोजा रखने की विशेष फजीलत बताई गई है.
जुलूस और ताजिया की तैयारियां
मुहर्रम की शुरुआत के साथ ही जुलूसों और ताजिया की तैयारियां भी तेज हो गई है. ताजिया बनाने वाले कारीगर भी तेजी से अपने काम में जुट गए हैं.

