चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों को साफ संदेश दिया कि किसी मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी होने के आधार पर उन्हें मिलने वाली पारिवारिक पेंशन को आधा (50%) नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अगर दूसरी पत्नी ही परिवार में एकमात्र जीवित और पात्र दावेदार है, तो वह पूरी पेंशन (100%) पाने की हकदार है। गुरदासपुर के एक सेवानिवृत्त जिला कोषागार अधिकारी की पत्नी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। अधिकारी का निधन 2011 में हुआ था। उनकी पहली पत्नी का निधन 1980 में ही हो चुका था और उन्होंने 1992 में याची से दूसरी शादी की थी।
महालेखाकार कार्यालय ने 2015 में उन्हें केवल 50 प्रतिशत पेंशन देने का आदेश दिया क्योंकि वे दूसरी पत्नी थी। विभाग का तर्क था कि पंजाब सिविल सेवा नियमावली के तहत पेंशन का बंटवारा किया गया है, जबकि पहली पत्नी का देहांत 30 साल पहले हो चुका था।
जस्टिस नमित कुमार की बेंच ने 25 मई 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विधवा को आधी पेंशन दी जा रही थी। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों की गलत व्याख्या की जा रही है। जब पहली पत्नी पहले ही गुजर चुकी है तो पेंशन बांटने का नियम लागू ही नहीं होता.
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