Kota Congress Crisis: राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले कोटा शहर कांग्रेस में नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही विवाद गहरा गया है। जिला सचिव मनु मेघवाल के इस्तीफे के बाद अब महासचिव बलविंदर सिंह बिल्लू, सचिव धर्मा गोचर और राजू पहाड़िया ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। तीनों नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भेजे इस्तीफे में पदावनति, पक्षपात और सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है।

नेताओं ने लगाया डिमोशन का आरोप
इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि नई कार्यकारिणी में उन्हें पहले की तुलना में छोटे पद देकर उनका डिमोशन किया गया है। उनका आरोप है कि लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर कुछ नेताओं के करीबी और चापलूसी करने वालों को अहम जिम्मेदारियां सौंप दी गईं।
राजू पहाड़िया ने कहा कि उन्हें प्रमोशन की बजाय डिमोशन दिया गया है, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे, लेकिन जिन लोगों को पद दिए गए हैं, उनका संगठन में कोई विशेष योगदान नहीं है।
इस्तीफों के पीछे रणनीति की चर्चा
इस्तीफा देने वाले नेताओं को कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल का समर्थक माना जाता है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि तीनों इस्तीफों की भाषा लगभग एक जैसी है, जिससे पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हिस्ट्रीशीटर को पद देने पर भी उठा विवाद
नई कार्यकारिणी में देवा भड़क को जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ नेताओं ने उन्हें हिस्ट्रीशीटर बताते हुए आपत्ति जताई है। हालांकि, कोटा शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी के हिस्ट्रीशीटर होने का कोई प्रमाण उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुकदमे अलग विषय हैं और संगठन सर्वोपरि है।
जिलाध्यक्ष बोलीं, नए लोगों को मिलेगा मौका
राखी गौतम ने कहा कि जिन्होंने पद से इस्तीफा दिया है, उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है। यदि वे कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं तो इसका स्वागत है। उन्होंने कहा कि इससे नए लोगों को संगठन में जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलेगा और कांग्रेस में गुटबाजी जैसी कोई स्थिति नहीं है।
निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने चुनौती
कोटा कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी का सामना करती रही है। पार्टी में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए प्रहलाद गुंजल और जिलाध्यक्ष राखी गौतम के अलग-अलग शक्ति केंद्र माने जाते हैं। नई कार्यकारिणी के गठन के बाद यह अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सामने आ गई है।
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