कुरुक्षेत्र। रिश्तों की कसौटी अक्सर मुश्किल वक्त में होती है, लेकिन कुरुक्षेत्र से सामने आई एक घटना ने भाई-बहन के रिश्ते को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 71 वर्षीय अविवाहित जुगल किशोर की मौत के बाद उनकी इकलौती बहन अस्पताल पहुंची, लेकिन अंतिम संस्कार में रुकने के बजाय शव को वहीं छोड़कर लौट गई। इसके बाद बाबा फरीद अनाथ आश्रम की कमेटी ने आगे बढ़कर न केवल अंतिम संस्कार किया, बल्कि बाद में उनकी अस्थियों का विसर्जन भी किया।
घटना से जुड़ी बातचीत का एक वीडियो सामने आया है। इसमें आश्रम संचालक बाबा निशान सिंह और जुगल किशोर की बहन पुष्पा रानी के बीच अंतिम संस्कार को लेकर बातचीत सुनाई देती है। बाबा निशान सिंह बहन से अंतिम संस्कार में शामिल होने और बाद में अस्थियां ले जाने की बात कहते हैं। इस पर पुष्पा कथित तौर पर कहती है- “संस्कार भी असी करिए, अस्थियां भी तुसी नी ले जा सकदे… तुसी ही कर दो संस्कार, तवाडी बहुत मेहरबानी होवेगी। मेरे पास समा है नी। मैं रुक नहीं सकदी।” यानी उसके पास समय नहीं है और वह रुक नहीं सकती। पुष्पा ने अपनी तबीयत ठीक न होने की बात भी कही।
करीब 10 साल से पिहोवा में रह रहा था जुगल
बाबा निशान सिंह के मुताबिक, जुगल किशोर मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला था। वह करीब 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ क्षेत्र में रह रहा था और आश्रम की देखरेख से जुड़े लोगों के संपर्क में था। उसकी शादी नहीं हुई थी। परिवार में उसकी छोटी बहन पुष्पा रानी के बारे में ही जानकारी थी। बताया गया कि जुगल अपनी बहन से मिलने के लिए समय-समय पर दिल्ली भी जाता था।
करीब दो सप्ताह पहले उसकी तबीयत बिगड़ी तो आश्रम से जुड़े लोग उसे पिहोवा लेकर आए। यहां सरकारी अस्पताल में उसका इलाज चला और हालत गंभीर होने पर उसे कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी दौरान आश्रम की ओर से उसकी बहन से संपर्क करने की कोशिश भी की गई।

आखिरी वक्त में बहन को बुलाया, लेकिन नहीं आई
बाबा निशान सिंह का कहना है कि जुगल की हालत लगातार बिगड़ रही थी। काफी प्रयास के बाद पुष्पा रानी से संपर्क हो सका। उसे भाई की गंभीर स्थिति की जानकारी देकर अस्पताल आने के लिए कहा गया, लेकिन वह तत्काल नहीं पहुंची। 4 सितंबर को इलाज के दौरान जुगल किशोर की मौत हो गई।
भाई की मौत की सूचना मिलने के बाद पुष्पा किसी तरह कुरुक्षेत्र के अस्पताल पहुंची। वहां उसने भाई का शव देखा। इसके बाद जब अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी और उसके साथ चलने की बात हुई तो उसने अपने पास समय नहीं होने और तबीयत ठीक न होने की बात कही।
‘आप ही कर दो संस्कार…’
बाबा निशान सिंह के अनुसार, उन्होंने पुष्पा से यह भी कहा कि अगर अंतिम संस्कार वह नहीं कर सकती तो कम से कम अस्थियों के विसर्जन की जिम्मेदारी तो उसे निभानी चाहिए। इस पर भी पुष्पा ने असमर्थता जताई। उसने हाथ जोड़ते हुए कहा कि वह यह काम भी नहीं कर पाएगी और आश्रम ही सब कर दे।
इसके बाद पुष्पा अपने एक रिश्तेदार के साथ अस्पताल से चली गई। बाबा निशान सिंह का दावा है कि वह अंतिम संस्कार के लिए नहीं रुकी। जुगल किशोर का शव अस्पताल में ही रह गया।
आश्रम कमेटी ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी
परिजन के पीछे हटने के बाद बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने जुगल किशोर की अंतिम क्रिया की जिम्मेदारी उठाई। शव को पिहोवा लाया गया और विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार को उनकी अस्थियों को सरस्वती नदी में प्रवाहित किया गया।
बाबा निशान सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि भाई-बहन के बीच इस तरह की स्थिति देखना उनके लिए बेहद पीड़ादायक था। उनका कहना है कि जुगल ने जिंदगी के करीब एक दशक आश्रम और तीर्थ क्षेत्र में बिताया और आखिरी समय में भी आश्रम से जुड़े लोगों ने ही उसकी जिम्मेदारी संभाली।
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी रिश्तों और बदलती पारिवारिक संवेदनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, पुष्पा रानी की ओर से इस पूरे मामले पर अलग पक्ष सामने आता है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
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