गोविंद पटेल, कुशीनगर. न्यायालय के स्टे के बाद भी विवादित भूमि पर हस्तक्षेप और कब्जा दिलाने की कोशिश के आरोप ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पडरौना तहसील क्षेत्र के कटकुइया गांव में एक भूमि विवाद को लेकर हल्का लेखपाल की भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है. ग्राम कटकुइया निवासी श्रीराम पटेल ने उपजिलाधिकारी पडरौना को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि जिस भूमि विवाद पर मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जिस पर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रभावी है, उसी भूमि पर विपक्षी पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए कार्रवाई की जा रही है.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिना किसी सक्षम आदेश के विवादित भूमि पर पत्थर (सीमांकन पिलर) तक लगा दिया गया. राम पटेल के अनुसार गाटा संख्या 2370, 2371 एवं 2366 में उनका दो-तिहाई हिस्सा है. इस भूमि को लेकर विवाद न्यायालय में लंबित है. हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया हुआ है. इसके बावजूद विपक्षी पक्ष जमीन का विक्रय और कब्जा दिलाने का प्रयास कर रहा है. पीड़ित का आरोप है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करते हुए राजस्व अभिलेखों और जमीन से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप किया जा रहा है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हाईकोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए. साथ ही विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के हस्तांतरण, सीमांकन या कब्जे की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए.

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सवालों के घेरे में राजस्व व्यवस्था

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और स्थगन आदेश प्रभावी है, तब विवादित भूमि पर गतिविधियां किसके संरक्षण में संचालित हो रही हैं? क्या हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी की जा रही है या फिर प्रशासन तक सही तथ्य नहीं पहुंचाए गए हैं? मामले में पक्ष जानने के लिए हल्का लेखपाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ. ऐसे में आरोपों पर उनका पक्ष सामने नहीं आ सका.

अब प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर

फिलहाल शिकायत एसडीएम पडरौना के समक्ष पहुंच चुकी है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है. भूमि विवाद से जुड़े इस प्रकरण ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और न्यायालयी आदेशों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.