अनिल मालवीय, इछावर। कहते हैं कि ‘कागज़ के फूल’ खुशबू नहीं देते कुछ इस तरह ‘कागज़ी दावे’ पहली ही बारिश में बह जाते हैं। कुछ ऐसा ही नज़ारा सीहोर जिले के इछावर में देखने को मिला है, जहां मानसून से पहले हुई हल्की सी बारिश ने इछावर नगर परिषद के स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के वादों को खोखला साबित कर दिया है। परिषद की दावों की हकीकत अब सड़कों पर बहती नज़र आ रही है। इछावर की सड़कों पर पसरा नालियों का कीचड़ चीख-चीख कर नगर परिषद की घोर लापरवाही और उदासीनता की गवाही दे रहा है।

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अवार्ड ‘जेब’ में, गंदगी ‘सड़क’ पर

बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस इछावर नगर परिषद ने स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए और जो परिषद दिल्ली-भोपाल से स्वच्छता का अवार्ड लेकर अपनी पीठ थपथपाती नहीं थकती थी, आज उसी इछावर की जनता गंदगी और बदबू के साए में जीने को मजबूर क्यों है?

चोक पड़ी हैं नालियां, सड़कों पर आया कीचड़

स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद पर सीधा आरोप लगाया है कि जवाबदेहों ने पिछले कई महीनों से शहर की नालियों की सुध ही नहीं ली गई। नालियां कचरे और कीचड़ से पूरी तरह चोक हो चुकी थीं। नतीजा यह हुआ कि हल्की सी बारिश होते ही नालियों का सारा गंदा और बदबूदार पानी उफनकर सीधे मुख्य सड़कों और लोगों के घरों के सामने आ गया।

सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता, मंडरा रहा बीमारियों का खतरा

शहर के नागरिकों का कहना है कि इछावर में सफाई के नाम पर केवल कागजी औपचारिकता निभाई जा रही है। शहर के कई कोनों में कचरे के पहाड़ खड़े हैं, जिससे अब इलाके में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा तेजी से मंडरा रहा है। जनता अब खुलकर यह पूछ रही है कि अगर सफाई व्यवस्था इतनी ही चाक-चौबंद थी तो पहली ही हल्की बारिश में यह ‘जलजला’ क्यों आ गया? स्वच्छता के नाम पर जो लाखों का बजट पास हुआ, वो आखिर किसकी जेब में गया?

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कुंभकर्णी नींद से कब जागेंगे जिम्मेदार?

अवार्ड की चमक से जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली इछावर नगर परिषद को अब एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए। जनता समय पर टैक्स भरती है, नरक जैसी स्थिति में रहने के लिए नहीं। अगर एक हल्की बारिश का यह आलम है तो आगामी भारी बारिश में इछावर का क्या हाल होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि इस बदहाली को देखने के बाद भी जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए रहते हैं या फिर कागजी घोड़ों को दौड़ाना बंद कर ज़मीन पर उतरकर नालियों की वास्तविक सफाई करवाते हैं।

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