उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने साक्षर भारत योजना के तहत काम कर चुके शिक्षा प्रेरकों और जिला व ब्लॉक समन्वयकों के बकाया मानदेय भुगतान को मंजूरी दी है. इस फैसले से 95 हजार से अधिक प्रेरकों और समन्वयकों को लाभ मिलेगा.

सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में साक्षर भारत योजना के तहत काम कर चुके शिक्षा प्रेरकों तथा जिला और ब्लॉक समन्वयकों के बकाया मानदेय के भुगतान को मंजूरी दी गई. इस फैसले से 95 हजार से अधिक प्रेरकों और समन्वयकों को लाभ मिलेगा. भुगतान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा उपस्थिति प्रमाणित किए जाने के बाद किया जाएगा.

योजना में इतने कर्मी

केंद्र प्रायोजित साक्षर भारत योजना 31 मार्च 2018 को समाप्त हो गई थी. योजना के तहत प्रदेश में 256 जिला समन्वयक, 746 ब्लॉक समन्वयक और 94,360 शिक्षा प्रेरक कार्यरत थे, जिनका मानदेय बकाया था.

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा से जुड़े हर वर्ग के हितों के प्रति संवेदनशील है. उन्होंने बताया कि इन प्रेरकों और समन्वयकों ने प्रदेश में साक्षरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

398.18 करोड़ की देयता

अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि 2017-18 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कुल बकाया राशि 401.25 करोड़ रुपये थी. न्यायालय के आदेशानुसार व्यय घटाए जाने के बाद वर्तमान देयता 398.18 करोड़ रुपये है.

उन्होंने बताया कि राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के मुख्य बैंक खाते में 137.65 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं. ऐसे में शेष 260.53 करोड़ रुपये अवमुक्त करने होंगे. वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 336.91 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

उपस्थिति के बाद भुगतान

पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि यह राशि निदेशक (साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश, लखनऊ) के नियंत्रण में रखी जाएगी. संबंधित प्रेरकों और समन्वयकों की उपस्थिति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद भुगतान की कार्यवाही पूरी की जाएगी.