रेणु अग्रवाल, धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। लोकायुक्त की टीम ने जिला शिक्षा केंद्र धार के जिला परियोजना समन्वयक प्रदीप कुमार खरे को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी स्कूलों में निर्माणाधीन शौचालयों के काम करने से पहले प्रमाण पत्र पर साइन करने के बदले लाखों रुपए की कमीशन की मांग की।
17 लाख रुपए की मांगी थी रिश्वत
लोकायुक्त पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा अभियान के तहत धार जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में 122 शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इस पूरी परियोजना के लिए शासन द्वारा लगभग 3 करोड़ 42 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इन निर्माण कार्यों का सुपरविजन जिला शिक्षा केंद्र धार में पदस्थ प्रभारी सहायक यंत्री दिलीप साधव कर रहा है।
आरोप है कि इन शौचालयों का निर्माण कार्य अभी चल ही रहा था, लेकिन DPC प्रदीप कुमार खरे ने कार्य पूर्ण प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के एवज में कुल स्वीकृत राशि का 5 प्रतिशत यानी 17 लाख बतौर रिश्वत की मांग की थी।
पहली किश्त लेते ही लोकायुक्त ने दबोचा
परेशान होकर प्रभारी सहायक यंत्री दिलीप साधव ने इसकी लिखित शिकायत लोकायुक्त कार्यालय इंदौर के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश सहाय से की। लोकायुक्त टीम ने जब गुप्त रूप से शिकायत का सत्यापन कराया, तो रिश्वत मांगे जाने की बात सही पाई गई। इसके बाद आज एक विशेष ट्रैप दल का गठन किया गया। योजना के मुताबिक, जैसे ही आवेदक दिलीप साधव रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 1 लाख रुपए लेकर जिला शिक्षा केंद्र कार्यालय पहुंचे और आरोपी प्रदीप कुमार खरे को पैसे सौंपे, तभी पहले से घात लगाए बैठी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
लोकायुक्त टीम को देखकर कार्यालय में हड़कंप मच गया।भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्जकार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए लोकायुक्त इंस्पेक्टर सचिन पटेरिया ने बताया कि आरोपी DPC प्रदीप कुमार खरे के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018’ की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त की टीम आरोपी के खिलाफ वैधानिक और दस्तावेजी कार्रवाई में जुटी हुई है। निर्माण कार्यों में इस तरह की मोटी कमीशनखोरी उजागर होने के बाद अब विभाग के अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

