रांची। JSSC CGL के जरिए नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे हुए हैं। लगातार बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी मौके पर डटे हैं और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।

‘नियुक्ति रद्द करने की लिखित सूचना तक नहीं मिली’

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब तक नियुक्ति रद्द किए जाने की स्पष्ट लिखित सूचना नहीं दी गई है। उनका दावा है कि उन्होंने निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति हासिल की और लंबे समय से अपने पद पर काम कर रहे थे। ऐसे में अचानक पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने से उनके सामने रोजगार और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।

कर्मचारियों का सवाल- दोषी को सजा दें, पूरी प्रक्रिया क्यों रद्द?

कर्मचारियों का कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जो अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन कथित गड़बड़ी के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं है।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक नियुक्ति आदेश में भी यह प्रावधान था कि यदि जांच के दौरान कोई अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से धांधली या अनियमितता में दोषी पाया जाता है तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। ऐसे में उनका सवाल है कि व्यक्तिगत दोष तय करने के बजाय पूरी नियुक्ति को ही खत्म क्यों किया गया?

वर्षों की मेहनत के बाद मिली नौकरी, अब फिर बेरोजगारी का डर

कर्मचारियों ने बताया कि JSSC CGL की भर्ती प्रक्रिया लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पूरी हुई थी। कई अभ्यर्थियों ने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और इसके बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद उन्होंने अपने पद पर जिम्मेदारी संभाली और सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनकर काम किया। अब नियुक्ति रद्द होने के फैसले ने उनकी वर्षों की मेहनत और भविष्य दोनों को अनिश्चितता में डाल दिया है।

कई कर्मचारियों ने छोड़ी थी दूसरी सरकारी नौकरी

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का दावा है कि नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो पहले से किसी दूसरी नौकरी में कार्यरत थे। कुछ अभ्यर्थियों ने केंद्र सरकार, रेलवे या दूसरे राज्यों की सरकारी नौकरी छोड़कर झारखंड में सेवा देने का फैसला किया था।अब उनका कहना है कि नई नौकरी खत्म होने की स्थिति में पुरानी नौकरी में वापस लौटना भी आसान नहीं होगा। इससे उनके सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है।

‘सरकार की गलती की सजा हम क्यों भुगतें?’

कर्मचारियों का सबसे बड़ा सवाल परीक्षा व्यवस्था और उसकी जिम्मेदारी को लेकर है। उनका कहना है कि परीक्षा आयोजित कराने, उसकी सुरक्षा और पूरी चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों और सरकार की थी।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जांच में परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन मेहनत से परीक्षा पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उनके साथ अन्याय है।

अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे

कर्मचारियों ने संकेत दिया है कि सरकार के फैसले के खिलाफ वे न्यायालय की शरण लेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उन्हें न्यायपालिका से उम्मीद है और वे अपनी नियुक्ति तथा भविष्य की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

बारिश के बीच आंदोलन जारी, आमरण अनशन की चेतावनी

रांची में लगातार बारिश के बावजूद कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन शुरू करने की भी चेतावनी दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने हक और नौकरी की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।