लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समाज के उत्थान को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि घुमंतू समाज को सम्मान, अधिकार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड का गठन इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे इन समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी.
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सीएम योगी ने गिनाई घुमंतू समाज के संघर्ष की कहानी
गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित आभार कार्यक्रम में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों को संबोधित किया. इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को आगे बढ़ाने का काम किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1871 में बनाए गए क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत कई घुमंतू जातियों को गलत तरीके से अपराधी घोषित कर दिया गया था.
आजादी के बाद बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रयासों से इस कानून को समाप्त किया गया और वर्ष 1952 में इन समुदायों को विमुक्त जाति का दर्जा मिला. उन्होंने कहा कि यह समाज भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला समाज रहा है, जिसे लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रखा गया.
2014 के बाद शुरू हुआ घुमंतू समाज के लिए विशेष अभियान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 2014 के बाद केंद्र सरकार ने पहली बार विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए आयोग का गठन किया. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड का गठन किया है. उन्होंने कहा कि बोर्ड के माध्यम से इन समुदायों की पहचान, उनकी समस्याओं का समाधान, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए योजनाएं तैयार की जाएंगी. सीएम ने कहा कि सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने का काम भी कर रही है.
वनटांगिया गांवों से लेकर आदिवासी समुदायों तक पहुंचा विकास
योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि वनटांगिया गांवों को पहली बार राजस्व गांव का दर्जा देकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया. उन्होंने बताया कि मुसहर, थारू, बुक्सा, गौड़, चेरो, कोल और सहरिया जैसे वंचित समुदायों तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाने का काम किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इन समाजों के गौरव और इतिहास को सम्मान देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. श्रृंगवेरपुर में निषादराज गुह की भगवान श्रीराम के साथ प्रतिमा स्थापित की गई है. वहीं बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का विजय स्मारक बनाया गया है. इसके अलावा बलरामपुर के इमिलिया कोडर में ट्राइबल म्यूजियम की स्थापना की गई है और सोनभद्र व मिर्जापुर में भी जनजातीय संग्रहालय बनाए जा रहे हैं.
शिक्षा और रोजगार से जोड़ने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और घुमंतू समाज के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय शुरू किए गए हैं. इन विद्यालयों में बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है. इसके अलावा श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय, स्ट्रीट वेंडर्स, छात्रों और गरीब वर्गों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं. सीएम योगी ने कहा कि किसी भी समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा और रोजगार सबसे जरूरी हैं। सरकार का प्रयास है कि घुमंतू समाज के युवा आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ जीवन जी सकें.
‘क्रिमिनल ट्राइब नहीं, स्वतंत्रता सेनानियों की परंपरा का हिस्सा हैं ये समाज’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतू जातियां किसी भी दृष्टि से अपराधी समाज नहीं हैं. ये भारत की गौरवशाली परंपरा और स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की विरासत को आगे बढ़ाने वाले समुदाय हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन समुदायों को उनका अधिकार, सम्मान और विकास में बराबरी का अवसर देना है. घुमंतू विकास बोर्ड इसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा.


