Maa Durga Godh Bharai: नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान मां दुर्गा की गोद भराई की पूजा का विशेष महत्व है. यह अनुष्ठान मुख्य रूप से संतान सुख, अखंड सौभाग्य और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है. इस पूजा में मां भगवती को लाल या मैरून रंग की चुनरी में अक्षत (चावल), नारियल और सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है.
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क्या है पूजा की विधि? (Maa Durga Godh Bharai)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की गोद भराई की पूजा पूरी श्रद्धा और पारंपरिक विधि से की जाती है.
चुनरी बिछाना: पूजा की शुरुआत में मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने लाल या मैरून रंग की एक नई चुनरी बिछाई जाती है.
अक्षत अर्पण: इस चुनरी पर दोनों हाथों से सात बार अक्षत चावल रखा जाता है. यह सात बार की क्रिया विशेष सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है.
सुहाग सामग्री: अक्षत के ऊपर नारियल, हल्दी, कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, नेलपॉलिश, काजल, इत्र, ड्राई फ्रूट्स, सुपारी, पान के पत्ते जैसी संपूर्ण सुहाग सामग्री माता की गोद भरने के रूप में रखी जाती है.
पूजन और मंत्र: इसके बाद, यह चुनरी मां दुर्गा के चरणों में रखकर विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस दौरान मंत्रों के साथ सिंदूर और अक्षत चढ़ाकर मां की आराधना की जाती है.
सामग्री का विसर्जन: पूजा के अंत में, मां की गोद में से आधी मुट्ठी अक्षत और नारियल आदि कुछ सामग्री वापस ले ली जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में रखा जाता है. बाकी बची हुई समस्त सामग्री किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दी जाती है.
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कब है शुभ मुहूर्त? (Maa Durga Godh Bharai)
यह पूजा आमतौर पर नवमी तिथि को करना सबसे अधिक शुभ माना जाता है, लेकिन इसे षष्ठी या सप्तमी तिथि पर भी संपन्न किया जा सकता है.
इस पूजा का मुख्य उद्देश्य मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करना है, ताकि परिवार में सुख-शांति बनी रहे और संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण हो सके. संपूर्ण धार्मिक माहौल में मंत्रोच्चार के साथ की जाने वाली यह पूजा भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है.

