मोहम्मद करीमुल्लाह/मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले में एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है। एटीएस (ATS) की संयुक्त टीम ने मध्य प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ी छापेमारी की जिसमें सरिसब पाही के नवटोल निवासी मौलाना इजहारुल हक के पाकिस्तानी हैंडलर से संबंधों और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस छापेमारी ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है।

​एक साथ दो ठिकानों पर छापेमारी

​रविवार की देर रात एटीएस ने सुनियोजित तरीके से दो अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी। पहली टीम ने पंडौल थाना क्षेत्र के सरिसब पाही स्थित मौलाना के पैतृक आवास पर छापेमारी की जहां उसकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। वहीं दूसरी टीम ने मधुबनी शहर के उर्दू मोहल्ला स्थित मदरसा नूर-ए-मोहम्मदिया को खंगाला जहां मौलाना अपने तीन बेटों के साथ रहता था। इस कार्रवाई के दौरान एटीएस को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और संदिग्ध डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं।

मुंबई कनेक्शन और आतंकी नेटवर्क

स्थानीय सूत्रों के अनुसार मौलाना इजहारुल हक का नेटवर्क काफी विस्तृत था। वह अक्सर मुंबई की यात्रा करता था जहां उसे पाकिस्तानी हैंडलरों से फंडिंग मिलती थी। मुंबई के बाद वह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में अपने सहयोगियों से मिलता था। माना जा रहा है कि इन्हीं स्थानों पर बैठकर वह राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की पटकथा लिखता था। उसका संबंध सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद से भी बताया जा रहा है और वह वर्ष 2019 से अपने मदरसा गतिविधियों को केंद्र बनाकर सक्रिय था।

​बीते एक साल से रडार पर था नेटवर्क

​यह कार्रवाई मार्च 2025 में हुए जाली नोट तस्करी मामले की कड़ियों को जोड़ने का परिणाम है। उस दौरान एसएसबी और मधुबनी पुलिस ने मो. राशिद जमाल उर्फ कमाल और हाजी मोहम्मद ओवैस को गिरफ्तार किया था। एटीएस की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मौलाना इजहारुल हक पिछले एक साल से कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और देश की सुरक्षा के खिलाफ सक्रिय था। फिलहाल एटीएस पकड़े गए संदिग्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है, जिससे आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।